लक्ष्मणराव इनामदार का जीवन तपस्वी, अलौकिक था – सरसंघचालक डाॅ. मोहन भागवत
मुंबई , दि. 6
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रांतीय प्रचारक लक्ष्मणराव इनामदार का जीवन तपस्वी और अलौकिक था, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के स्पर्श ने उन्हें संत बना दिया, यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंचालक डॉ. मोहन भागवत ने यहां कही।
वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजाभाऊ नेने द्वारा लक्ष्मणराव इनामदार के जीवन पर लिखित गुजराती पाठ ‘सेतुबंध’ के मराठी अनुवाद के लॉन्च समारोह में अध्यक्ष के रूप में बोल रहे थे।
यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक, बिमल केडिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
इनामदार ने उपलब्धियाँ, वकालत की शिक्षा, गुण और आध्यात्मिक प्रतिभा को संघ कार्य में झोंक दिया। भागवत ने यह भी कहा कि अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए साधना या तपस्या किए बिना भारत विश्वगुरु नहीं बन सकता और हमारा समाज शांतिपूर्ण, गौरवशाली और नैतिक नहीं बन सकता।
यदि देश के जीवन को विश्व का मार्गदर्शक बनाना है तो यही एकमात्र मार्ग है। जो लोग टीम के दृष्टिकोण या सोच को स्पष्ट रूप से समझते हैं, उनकी दिशा या निर्णय टीम के सिद्धांतों के साथ टकराव नहीं कर सकते हैं। भागवत ने यह भी बताया कि आपातकाल के दौरान उनका तबादला कर दिया गया था।

