“इंस्पेक्टर राजकुमार कोथमिरे नहीं रहे”
ABI News
राजकुमार कोथमिरे अब ठाणे पुलिस के हफ्ता विरोधी प्रकोष्ठ के इंस्पेक्टर नहीं रहे। एक लम्बे इंतज़ार के बाद ठाणे से बहुत दूर नक्सलवादी जिले गडचिरोली में उनका ट्रांसफर कर दिया गया है।
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इस बार दाढ़ी वाले बाबा की कृपा भी बेअसर रही। कोथमिरे शुक्रवार को गडचिरोली के लिए रवाना हो गए। वहां वे डीआईजी के रीडर के तौर पर काम करेंगे। अब इंस्पेक्टर संजय शिंदे ने उनका कार्यभार संभाल लिया है।

मृदुभाषी, मिलनसार कोथमिरे भ्रष्ट लोगों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। उनके अचानक चले जाने से भ्रष्ट, हरामखोरों और क्रिमिनल्स के लिए यह निजी क्षति है।
ठाणे हफ्ता विरोधी प्रकोष्ठ में अब कितने भी भ्रष्ट इंस्पेक्टर आ जाएँ लेकिन उनकी जगह कोई नहीं ले सकता। भ्रष्ट और भ्रष्टाचार की दुनिया में उनका नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित किया जायेगा।

कोथमिरे साहब के ‘उत्कृष्ट’ कार्यों को शब्दों में लिख पाना मुश्किल है। उन्हें जन स्वाभिमान समाचार पत्र ने ‘एक्सटॉरशन का राजकुमार’ नाम से विभूषित किया था। बुकी सोनू जालान, केतन तन्ना और बिल्डर मयूरेश राऊत को लेकर आजकल टीवी चैनल्स और न्यूज़ पेपर्स उनका गुणगान करने में लगे में हैं।
अंत में उनके बारे में दो शब्द बोलकर मैं अपनी वाणी को विराम देना चाहूंगा कि उनके असमय ठाणे से चले जाने पर घाटकोपर में हाकरों ने मिठाइयां बांटीं हैं। घाटकोपर पुलिस स्टेशन से रात को जब जोर-जोर से रोने-चिल्लाने की आवाज़ एलबीएस रोड तक आती थी तो लोग समझ जाते थे कि कोथमिरे साहब आज नाइट ड्यूटी पर हैं। निरीह हॉकरों की बेदम पिटाई कर कोथमिरे साहब उनकी दिन भर की कमाई लूट लेते थे। ॐ शांति।

