एवरेस्ट फतह करने वाले बेटे की दुर्घटना में मौत,लाश तलाशने पिता से मांगे जा रहे है १० लाख रूपए
(देवकी यादव)
7 अप्रैल को एवरेस्ट फतेह करने की कहकर घर से निकला रवि ठाकुर की दुर्घटना में मौत की खबर उसके पिता महेश ठाकुर को हफ्ते भर पहले ही मिल गई थी, और लगातार प्रयास करने के बावजूद 3 दिन से उन्हें बेटे का मुंह देखने तक को नहीं मिला है. इतना ही नहीं बेटे के शव को तलाशने के एवज में पिता महेश ठाकुर को 9.84 लाख रुपये का बिल थमा दिया गया है. बिल चुकाने पर दो दिन में शव तलाशने की बात कही जा रही है.
गांधी को अच्छे से पढ़ने वालों को चाहिए, एक बार गोडसे को भी पढ़ें
तारानगर के रहने वाले बीएसएनएल कर्मी महेश ठाकुर का बेटा रवि पर्वतारोही था. 7 अप्रैल को वह एवरेस्ट फतेह करने की कहकर घर से निकला था. रवि चार भाई-बहन में तीसरे नम्बर पर था. महेश बताते हैं कि रवि गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था. एवरेस्ट पर जाने के लिए उसने पर्वतारोही एन रिचर्ड हन्ना का ग्रुप चुना था. 10 मई को बेटे से आखिरी बात हुई थी. 11 मई को टीम ने एवरेस्ट पर चढ़ना शुरू किया था.
बढ़ती गर्मी और हमारा सामाजिक कर्तव्य
16 मई की दोपहर एवरेस्ट पर रवि ने तिरंगा फहराया था. लेकिन उसके बाद लौटते वक्त हादसा हो गया. हमे सूचना मिली कि रवि की मौत हो गई है. परिवार के कुछ लोग नेपाल पहुंच गए हैं. सोनीपत प्रशासन के अनुसार शव की तलाश जारी है.
बढ़ती गर्मी और हमारा सामाजिक कर्तव्य
वहीं, सर्च ऑपरेशन चलाने वाली एजेंसी सेवन माउंट्री ने 44 हजार यूएस डॉलर (करीब 9.84 लाख रुपए) के बिल की मांग की है. परिवार इतनी बड़ी रकम जमा करने में असमर्थ है. वहीं सोनीपत प्रशासन का कहना है कि हम पूरी तरह से रवि के परिवार के साथ हैं. रकम बड़ी होने की वजह से सरकार को मामले की रिपोर्ट भेजी गई है.
डोम्बिवली के कपड़ा प्रोसेस कम्पनियो के प्रदूषित धुओ से हजारो लोग प्रभावित, प्रदुषण मंडल उदासीन

