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लानत है ऐसे हिन्दुओं पर !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयाग राज क्या किया चारों ओर हंगामा मच गया है।  खासकर सोशल मीडिया पर कुछ हिन्दू ही इस नाम परिवर्तन पर कटाक्ष कर रहे हैं। ऐसे हिन्दुओं को मेरी नज़र में हिन्दू कहलवाने का कोई अधिकार नहीं है।  सदियों तक मुगलों की गुलामी सहने के बाद आज जब हिंदुत्ववादी सरकार बनी है और वह मुगलों की निशानियों को खत्म कर हिन्दुस्तान को मूल रूप – मूल पहचान देने में लगी है तो कुछ हिन्दुओं को ही परेशानी होते दिख रही है। ऐसा इस लिए भी है क्योंकि हिन्दुओं में एकता नहीं है। हिन्दुओं में आज भी मुगलों की तारीफ़ करने वाले लोग भरे पड़ें हैं। हमारे देवी देवताओं के इतिहास को इन मुगलों ने तहस नहस कर दिया।  बाबर जैसे आततायी ने राम जन्म भूमि को ध्वस्त कर मस्जिद का नापाक ढांचा खड़ा कर दिया।  लाखों हिन्दुओं को जबरन मुस्लिम बना दिया। मगर हमने इतिहास से कोई भी सबक नहीं सीखा।  हम हिन्दुओं को प्रतिकार करने की अपनी ताकत का एहसास ही नहीं रह गया है।  हम पहले मुगलों से पिटते रहे – फिर अंग्रेज़ों ने हमारी संस्कृति को खत्म किया।  हमारे पर्वों पर भी मुगलों ने मांस  शुरू करवा दिया और उसको बलि का नाम देकर प्रचलित कर दिया। हिन्दुओं की सहनशीलता को कायरता समझा गया।  अब जब सदियों बाद देश में हिन्दुओं की सरकार बनी है और पिछले कलंक मिटाने के प्रयास शुरू किये जा रहे हैं तो कुछ हिन्दू ही सरकार के फैसलों पर ऊँगली उठाने में लग गए हैं।  ऐसे में हमें यह सोचना पडेगा कि क्या छद्म नाम से मुस्लिम लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं या फिर खुद हिन्दू जनमानस गहरी नींद सोया हुआ है।  इलाहाबाद तो सिर्फ झांकी के रूप में सामने आया है।  अभी तो लखनऊ का लखनपुर करना बाकी है।  जिस तथाकथित हिन्दू को इसमें आपत्ति हो वह ख़ुशी से अल्लाह का नाम लेकर अपनी खतना करवा सकता है।

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