शिवसेना के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस पार्टी के नेतागण राज्य में सत्ता स्थापन के लिए लगातार सकारात्मक बयान बाजी कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस और रॉकपा के ही सूत्र मामला “पहले ढाई वर्ष मुख्यमंत्री कौन” पर अटका हुआ बता रहे है
कांग्रेस जहां लगातार राकपा प्रमुख शरद पवार पर यह दबाव बना रही है कि पहले ढाई वर्ष राकपा का मुख्यमंत्री हो वहीं शिवसेना नेतृत्व पहले ढाई वर्ष शिवसेना का मुख्यमंत्री होने का बात पर अड़ी हुई है और इन्हीं कारणों से राज्य में शिवसेना राकपा कांग्रेस सरकार बनने में देरी हो रही है
ज्ञात हो कि विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के 19 दिन बीत जाने के बावजूद राज्य में कोई भी दल सरकार बनाने के लिए आगे नहीं आया है पिछले चार-पांच दिन से शिवसेना ने भाजपा के साथ न जाते हुए कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं के सहयोग से सरकार बनाने के लिए संपर्क साधा है
कांग्रेस के राज्य के नेता भी इस बारे में सकारात्मक है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी राज्य में भाजपा की सरकार नहीं लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है लेकिन मामला पहले ढाई वर्ष मुख्यमंत्री कौन पर अटक गया है
कांग्रेस और राकपा सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली में हुई कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ राकपा नेताओं की बैठक में मामला शिवसेना और राकपा के ढाई ढाई वर्ष मुख्यमंत्री और कांग्रेस के पूरे 5 वर्ष उपमुख्यमंत्री रहने की बात पर तय हुआ है लेकिन शिवसेना पहले ढाई वर्ष मुख्यमंत्री का पद अपने पार्टी के लिए मांग रही है
जबकि कांग्रेस नेतृत्व को आशंका है की शिवसेना पहले ढाई साल का अपने मुख्यमंत्री का कार्यकाल कांग्रेस और राकपा की मदद से पूरा कर लेगा लेकिन जब राकांपा की बारी आएगी तो शिवसेना पलटी खा जाएगा. तो कांग्रेस और राकपा को हाथ मलने के अलावा कोई एनी उपाय नही बचेंगे.
सूत्र के अनुसार इसीलिए कांग्रेस नेतृत्व ने शिवसेना से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से शिवसेना कोटे से केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री अरविंद सावंत के इस्तीफा की मांग की गई थी शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद पाने के लिए अपने सहयोगी राकांपा और कांग्रेस की यह मांग पूरी कर दी.
लेकिन शायद इस पर भी कांग्रेसियों को भरोसा नही हो रहा. उनके अनुसार शिवसेना अपने ३० वर्ष पुराने सहयोगी भाजपा को छोड़ने में अगर समय नही गवाती है तो कांग्रेस राकपा के साथ गलत नही करेगी इसकी क्या गारेंटी ?
राज्य सत्ता में साथ आने के लिए शायद कांग्रेस शिवसेना को पूरी तरह अपने रंग में रंगना चाह रही है. रोज कांग्रेस राकांपा के साथ शिवसेना के नेताओं की बैठक हर घंटे बैठक हो रही है. और इन बैठको के निर्णय ये तीनो दलों के नेताओं को सुनाये जा रहे है.
तीनो दलों में हलचल जोर शोर से है लेकिन अगर शिवसेना का मुख्यमंत्री अगले ढाई वर्ष बनता है और ढाई वर्ष बाद अन्य दलों के मुख्यमंत्री बनाने के समय शिवसेना नकार देती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा यही बात राकपा और कांग्रेस नेताओ में गहन मंथन का विषय बना हुआ है.
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