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कहाँ है शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी ? “तनखैया” घोषित करे कांग्रेसी खालसा पंथियों को

(कर्ण हिन्दुस्तानी )
एक समय था जब खालसा पंथ की सबसे बड़ी संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी ने तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को मात्र इस बात के लिए तनखैया घोषित कर दिया था क्योंकि उनके रहते हुए स्वर्ण मंदिर में फ़ौज घुसी थी और ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम दिया गया। ज्ञानी जैल सिंह ने भी कमिटी के निर्णय को मान्य करते हुए राष्ट्रपति रहते हुए कुछ दिन स्वर्ण मंदिर में आने वालों के जूते साफ़ किये और कोई शर्म महसूस नहीं की।
अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा के बयान के बाद भी कांग्रेस में बने रहने वाले खालसा पंथियों के खिलाफ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी क्या कदम उठा रही है ? क्या कमिटी को यह नहीं लगता कि कम से कम अब खालसा पंथियों को कांग्रेस से किनारा लेना चाहिए। क्या  कमिटी भी यह मान चुकी है कि जो हुआ – सो हुआ। यदि ऐसा नहीं है तो क्या मज़बूरी है कि अभी तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी ने कोई प्रतिक्रिया  नहीं दी।
क्या कमिटी को यह हक़ नहीं है कि वह खालसा पंथियों के हित की बात करते हुए अपना पक्ष रखे। इंदिरा गाँधी की जघन्य हत्या के पश्चात जो कुछ भी खालसा पंथियों के साथ हुआ क्या वह कांग्रेस द्वारा आयोजित  नहीं था ? क्या राजीव गाँधी के बयान के बाद हिंसा और नहीं भड़की थी ? यदि ऐसा नहीं  है तो कमिटी का काम  क्या है वह भी बताना होगा। वरना हमें तो लगेगा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी किसी काम की नहीं है।

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