डोम्बिवली औधोगिक क्षेत्र की कपड़ा प्रोसेस कम्पनिया और कल्याण प्रदुषण मंडल के अधिकारियों की भ्रष्ट नीतियों के कारण डोम्बिवली ओधोगिक क्षेत्र के चारो तरफ बसे हजारो लोगो को गंदे और प्रदूषित वातावरण में निरंतर रहना पद रहा है. आसपास के नागरिको में एकजुटता का आभाव कहे या फिर जागरूकता का आभाव, कही से भी इसके विरुद्ध आवाज उठती नही दिखती है जबकि स्थानीय प्रदुषण मंडल अधिकारी इस मामले में सिर्फ खाना पूर्ति करते है और कारवाई नही करने के एवज में हर महीने इन सभी कम्पनियों से अवैध रकम भी वसुते है.
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प्राप्त जानकारी के अनुसार डोम्बिवली ओधोगिक परिसर में डेढ़ सौ से अधिक कपडा प्रोसेसिंग कम्पनिया है. जहा कपड़ो पर विभिन्न रासायनिक प्रक्रिया करने के लिए हर कंपनी में स्टीम (गर्मी) की जरूरत है जो बोयालेर को गर्म करके तैयार किया जाता है. और बोयलर को गर्म करने के लिए भठे की जरूरत होती है,
कपड़ा प्रोसेस कम्पनियो में वायु प्रदुषण का मुख्य कारण इन्ही भठ्ठीयो के चिमनियो से निकलने वाले धुए है. १५-२० वर्ष पहले इन प्रोसेस कम्पनियों में बोयलर को गर्म करने क्र लिए देश कोयले का उपयोग किया जाता था. जिससे वायु प्रदूषण कम फैलता था. लेकिन अब बाजार में इंडोनेशिया और साउथ अफ्रीका का सस्ता कोयला आ गया है देशी कोयला जहा ५०-६० रूपये किलो है वहि ये विदेशी कोयला ७-७.५० रूपये किलो कम्पनी तक पहुचा के मिलते है.
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इस विदेशी कोयले से न सिर्फ धुआ निकलता है बल्कि इसके साथ कोयले के छोटे छोटे कण भी दूर दूर तक हवा में घूमते रहते है और ठंडा होने के बाद उक्त कपनी के आसपास गिरने के साथ औधोगिक परिसर के आसपास स्थित निवासी विभाग में भी लगातार गिरते है.इसकी सच्चाई औधोगिक परिसर के आसपास स्थित निवासी विभाग के छत या छ्परो का नजारा देख कर समझा जा सकता है. यहाँ रेती के कणों का जमावड़ा अपने आप अपनी खानी वया करता है.
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अनेक बार स्थानीय लोगो ने इसकी शिकायत प्रदूषण मंडल कल्याण के अधिकारियों से लिखित रूप से भी की है. लेकिन प्रदुषण मंडल ने इस मामले में दिखावटी कारवाई की है और यहाँ के कपड़ा प्रोसेस कम्पनियों को प्रदुषण मंडल का अभयदान मिला हुआ है.
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