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शिवसेना इस बार भजपाइयो की कोइ होशियारी नही चलने देने के मुड मे

राज्य में विधानसभा चुनाव हुए 12 दिन हो गए हैं बावजूद इसके राज्य में किसी भी दल की सरकार स्थापित नहीं हो पाई है एक तरफ जहां भाजपा के नए सत्र के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार देवेंद्र फडणवीस 2 दिन पूर्व तक खुद को मुख्यमंत्री बनने की दावेदारी कर रहे थे तो दूसरी तरफ शिवसेना नेतृत्व बिना शिवसेना के लिए मुख्यमंत्री पद लिए भाजपा को नई सरकार बनाने के लिए समर्थन देने से सीधे तौर पर इंकार कर रहा है

दोनों तरफ से सहमति नहीं बनने के बावजूद दोनों दल अपने अपने मुख्यमंत्री बनाने की दावेदारी छोड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं. वही राज्य में शिवसेना द्वारा कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के समर्थन में सरकार बनाने की संभावनाएं बनती दिख रही है.

ज्ञात हो कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने लगातार दबाव बनाते हुए बिना शिवसेना से राय मशविरा किए, ना सिर्फ देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री घोषित कर दिया था. बल्कि बिना शिवसेना नेतृत्व के सहमति और उपस्थिति के देवेन्द्र फडणवीस को मुख्यमंत्री की शपथ भी दिलवा दी थी. लेकिन इस बार परिस्थितिया भाजपा के लिए अनुकूल नही है. और भाजपा बिना शिवसेना के समर्थन में सरकार नही बना सकती है. ऐसे में शिवसेना नेतृत्व भाजपा से पिचली बार की होशियारी का पूरा हिसाब सूद समेत बसूलने के फिराक में है शिवसेना के इस अड़ियल रुख से भाजपाई भी सकपका गए है. और मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने भी खुद को दुबारा मुख्यमंत्री बनने के बयानबाजी से कन्नी काटते दिख रहे है.

पिछले सत्र में भाजपा के पास 222 विधानसभा सदस्य थे और उसे सिर्फ 23 विधायकों की जरूरत थी उस दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने भाजपा को बिना शर्त समर्थन दिया इसी के बल पर भाजपा ने बिना शिवसेना के सहमति के सरकार बना ली. इस गहरे आघात को शिवसेना नेताओं ने लगता है. मन से लगा के रखा था.

इस बार के 2019 के चुनाव में भाजपा को महज 105 सीट ही आई है और इस बार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने भाजपा को किसी भी तरह का समर्थन नहीं देने का ऐलान कर दिया है जबकि देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनने के लिए उतावले हैं लेकिन विधानसभा पटल पर बहुमत सिद्ध करने के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं और लगातार 2 दिन पहले तक उनके ही मुख्यमंत्री बनने की दावेदारी कर रहे थे.

लेकिन शिवसेना के अड़ियल रुख से अब वे सम्भाल कर बोल रहे है. आज सोमवार को पत्रकारों ने जब उनसे मुख्यमंत्री दुबारा बनने पर सवाल किया तो वे टाल गए और सिर्फ यही कहा की राज्य में सरकार युति की ही बनेगी. यानी इस बार भाजपा की कोई होशियारी नही चल पा रही है.

rajesh

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