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देव आनंद की फिल्म के गानों की ‘तारों की महफिल’! – तालियाँ, सीटी और अवधूत गुप्त की दहाड़

डोंबिवली, दि . 7
डी.पी. म्हैस्कर फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘सुश्रव्य शोध’ गायन प्रतियोगिता के पिछले संस्करण के विजेता प्रतियोगियों के गीतों का कार्यक्रम ‘तरोंकी महफिल’ रविवार को सावित्रीबाई फुले थियेटर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गायकों द्वारा अभिनेता देव आनंद की फिल्मी गीतों की प्रस्तुति दी गई। गायक-संगीतकार अवधूत गुप्ते मुख्य अतिथि थे।

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कार्यक्रम की थीम, मंच सज्जा श्रीराम जोशी ने की और संकल्पना सचिन अवस्थी ने की। शुभदा पावगी और उदय चितले ने ‘सुश्रव्य शोध’ प्रतियोगिता के पिछले कुछ वर्षों के नंबर एक विजेताओं को एक साथ लाया।
कार्यक्रम की शुरुआत अनुजा म्हैस्कर के अभंग नृत्य से हुई, इसके बाद राइमा और तृषा ने कथक नृत्य पेश किया।
रेडियो जॉकी गौरव श्रीवास्तव ने खुमसदार कार्यक्रम ‘तारों की महफिल’ को होस्ट किया।
‘तरों की महफिल’ की शुरुआत अनघा विद्वानों के गाए गीत ‘प्रभुतेरो नाम’ से हुई। ‘फुलो की रंग से’ (राणा जाधव), परहान में भोला है (आयुषी देवस्थले), पिया तोसे नैना लागे रे (सुरभि देवस्थले), कभी खुद पे (प्रणव पाटिल), जरा जारे उड़ जा रे पंछी (मधुरा शेवड़े), दिल का भावर करे पुकार (अभिजीत करंजकर), तू कहा ये बता (साहिल जोशी), मोसे चल (रेशमा कुलकर्णी), तेरी जुल्फो से (सुकांत जावड़ेकर), ये दिल ना होता बेचारा (ओंकार प्रभुघते), तेरे मेरे सपने (निषाद वैद्य) ), खोया खोया चंद (भगवान कुलकर्णी), आया हो (नंदन जोशी), जाता कहा है (मानसी जोशी), दीवाना मस्ताना (सुषमा धुरी), जिया हो (धवल भागवत), हुस्न के लाखो रंग (पूजा देशपांडे), रात अकेली है (अनन्या नाइक) गाने पर परफॉर्म किया गया।
निषाद करालगिकर, प्रभाकर भोसेकर, संतोष दिवेकर, आशीष अरोस्कर, संदीप पेडनेकर, किरण गायकवाड़, संदीप कुलकर्णी, किशोर नरखेड़े, नागेश कोली ने संगीत तैयार किया है। संगीत रचना प्रशांत ललित की है। अनन्या नाइक, पूजा देशपांडे को प्रदर्शित गीतों में से ‘कोहिनूर’ के रूप में चुना गया।
अवधूत गुप्ते ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के बाद बिना किसी हिचकिचाहट के दर्शकों के अनुरोध को पूरा किया और बाई बाई मन मोराचा, दीपादी दीपांग, कंडे पोहे, जय जय महाराष्ट्र माझा जैसे गीतों की प्रस्तुति दी और पूरा हॉल तालियों और सीटियों से गूंज उठा। डी.पी. म्हैस्कर फाउंडेशन की सुधाताई म्हैस्कर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

rajesh

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