प्रांतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन में हिन्दू राष्ट्र के लिए संगठित होकर कार्य करने का हिंदुवादियो का दृढ निश्चय !_
*भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा लेकर धर्मसंस्थापना के लिए कार्य करेंगे ! – रणजित सावरकर,* कार्याध्यक्ष, स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक
स्वतंत्रतावीर सावरकर की सीख थी कि इतिहास की गलतियों से सीखकर इसे दोहराया न जाएं। इस सिख का अनुसरणन न करने का खामियाजा पूरे भारत भर के हिंदू भुगत रहे है।
आज भी भारत के प्रत्येक क्षेत्र में छोटे छोटे पाकिस्तान बन गए हैं । स्वयं को धर्मनिरपेक्ष कहलानेवाले ये समुदाय, हिन्दुओं को समाप्त करने की धमकी दे रहे हैं ।
ऐसी स्थिति में हिन्दुओं को भी स्वरक्षा के लिए अपनी शक्ति बढाने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है । रामराज्य स्थापित करना हमारा उद्देश्य है ।
यहां यह भूलना नहीं चाहिए कि प्रभु श्रीराम हमारे आदर्श हैं; परंतु शत्रु को उसी की भाषा में उत्तर देने के लिए कृष्ण नीति का भी उपयोग करना चाहिए ।
महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने हाथ में शस्त्र नहीं लिया, उन्होंने युद्ध करने की प्रेरणा दी । हमें भी भगवान श्रीकृष्ण से प्रेरणा लेकर धर्मसंस्थापना के लिए कार्य करना चाहिए ।
ऐसा प्रतिपादन *स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्याध्यक्ष श्री. रणजित सावरकर* ने किया । मुलुंड स्थित पद्मावती बैंक्वेट सभागृह में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न दो दिवसीय *प्रांतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन* में वे बोल रहे थे ।
सनातन संस्था की धर्मप्रचारक सद्गुरु (सुश्री) अनुराधा वाडेकर, राष्ट्रीय वारकरी परिषद पालघर के जिलाध्यक्ष ह.भ.प. प्रदीप महाराज पाटील, वसई (मेधे) के श्री परशुराम तपोवन आश्रम के संचालक भार्गवश्री बी.पी. सचिनवाला, महाराष्ट्र प्रदेश वारकरी संप्रदाय के तीर्थक्षेत्र समिति के कार्यकारी प्रमुख ह.भ.प. सुभाष गोविंदबुवा बन आदि की वंदनीय उपस्थिति इस अधिवेशन में थी
। मुंबई, ठाणे, रायगड और पालघर जिले के अधिवक्ता, उद्योगपति, डॉक्टर, सूचना-अधिकार कार्यकर्ता,विविध संप्रदाय, मंडल आदि के प्रतिनिधियों सहित कुल 32 संगठनों के 143 हिन्दुत्वनिष्ठ यहां सम्मिलित हुए थे ।
*‘हिन्दू राष्ट्र’ राष्ट्रीय आंदोलन बनना चाहिए ! – श्री. चेतन राजहंस,* राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था
कोरोना महामारी के संकट का हम सबने अनुभव किया है । अब विश्व महायुध्द का साया है । युध्दकालीन स्थिति, युध्दकाल के कारण भारत में उत्पन्न गृहयुध्द की संभावना और अराजकता आदि संकटों का सामना करते हुए कालानुसार आचरण करना पडेगा ।
हिन्दुत्वनिष्ठों के लिए हिन्दू राष्ट्र अंतिम ध्येय है और हिन्दुत्वनिष्ठ ही हिन्दू राष्ट्र के प्रवक्ता हैं । अपने अपने संगठन का कार्य करते समय हिन्दू राष्ट्र को केंद्र बिंदु रखकर कार्य करना चाहिए । ‘हिन्दू राष्ट्र’ राष्ट्रीय आंदोलन बनना चाहिए !
*हिन्दू धर्म को राजाश्रय देनेवालों को सत्ता में लाना चाहिए ! – पू. मोडक महाराज,* संस्थापक, श्री स्वामी समर्थ सेवा ट्रस्ट
हिन्दुत्वनिष्ठों के हाथों में ईश्वर ने धर्मरक्षा का ध्वज दिया है । यद्यपि धर्मकार्य करनेवालों के मार्ग अलग अलग हैं, तथापि उद्देश्य ‘हिन्दू धर्म की रक्षा’ ही है । प्राचीन काल में राजाश्रय होने के कारण हिन्दू धर्म प्रबल था । वर्तमान स्थिति में राजाश्रय न होने के कारण धर्मरक्षा का कार्य करना पडेगा । इसलिए धर्म को राजाश्रय देनेवालों को सत्ता में लाना चाहिए ।
*सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुभाष झा ने कहा कि,* ‘न्यायालय ने विविध निर्णय दिए हैं, तब भी विद्यालयों में ‘हिजाब’ की मांग के लिए धर्मांध आंदोलन करते हैं ।
इस प्रकार के अनेक सूत्र उपस्थित कर धर्मांध भारत को ‘गजवा-ए-हिन्द’ बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं ।मलेशिया जैसे अनेक इस्लामी देशों में हिजाब को कोई स्थान नहीं है । तब भारत में इस संबंध में मुंहजोरी क्यों ?’ *
अखिल भारतीय वीरशैव लिंगायत महासंघ के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष और प्रवक्ता डॉ. विजय जंगम ने कहा,* ‘हिन्दू धर्म को विविध जातियों में विभाजित करने के लिए इस देश में विशिष्ट शक्तियां कार्यरत हैं । हिन्दुओं में फूट डालने का प्रयास किया जा रहा है । वीरशैव और लिंगायत समाज हिन्दू धर्म का ही भाग हैं, यह ध्यान में रखना चाहिए ।’
इस अधिवेशन के प्रथम दिन संत और मान्यवरों के करकमलों से सनातन संस्था के ‘परात्पर गुरू डॉ.आठवलेजीके वर्ष 1992 में आयोजित अभ्यासवर्ग’ इस हिन्दी भाषा के ग्रंथों का लोकार्पण हुआ ।
इस अधिवेशन की गुटचर्चा में राष्ट्र और धर्मकार्य करते समय आनेवाली समस्याओं पर उपाययोजना के संबंध में हिन्दुत्वनिष्ठ और धर्मप्रेमियों को अवगत कराया गया । अधिवेशन के समापन समारोह में हिन्दुओं की विविध मांगों के लिए प्रस्ताव पारित किए गए ।
अंत में हिन्दू राष्ट्र स्थापना की शपथ लेते हुए ‘जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम् ।’ का घोष करते हुए जनकल्याणकारी हिन्दू राष्ट्र के लिए समर्पित होकर कार्य करने का दृढ निश्चय व्यक्त किया गया ।
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