तो मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी भी देश के गद्दार? – रंजीत सावरकर
कांग्रेस के ‘भारत जोड़ी’ अभियान के दौरान स्वतंत्रविर विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ राहुल गांधी ने एक पत्र का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाये है। जबकि वैसा ही मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी का हस्ताक्षर युक्त पत्र स्वतंत्रविर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्यकारी अध्यक्ष और सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने पत्रकारों को दिखाते हुए सवाल किया कि जो देश से गद्दारी का आरोप राहुल गांधी ने स्वतंत्र्यवीर सावरकर पर लगाया है तो फिर वही गद्दारी तो मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी ने भी अनेक बार की थी। फिर उन्हे भी गद्दार माना जाना चाहिए ?
उक्त सवाल स्वतंत्रविर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्यकारी अध्यक्ष और सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने किया है। रंजीत सावरकर शुक्रवार को दादर पश्चिम में स्वतंत्रविर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे।
रंजीत सावरकर के अनुसार आजादी मिलने के बाद जवाहरलाल नेहरू, तत्कालीन वाइसराय माउंटबेटन, उनकी पत्नी एडविना माउंटबेटन के साथ शिमला गए और बाद में उन्होंने हिंदुस्तान के विभाजन को मंजूरी दी, क्या यह देशद्रोह नहीं था? उन्होंने कांग्रेस के ‘भारत जोड़ी’ अभियान के दौरान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ राहुल गांधी के आरोप को मूर्खतापूर्ण बताया हैं।
उनके अनुसार स्वतंत्रवीर सावरकर के पत्र की अंतिम पंक्तियों को दिखाते हुए राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान को गूगल ट्रांसलेशन की तरह पढ़ा गया। मूल रूप से उस समय अंग्रेजी हुकूमत को पत्र लिखने का यही तरीका था। रंजीत सावरकर ने मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के पुराने पत्रों को सबूत के तौर पर उपस्थित पत्रकारों को दिखाया, इन पत्रों मे भी यही लिखा था, उनके अनुसार इन पत्रों के आधार पर तो मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी ने भी देश से गद्दारी की।

इतना ही नहीं, प्रेस वार्ता मे सावरकर ने यह भी सवाल किया कि जवाहरलाल नेहरू हर रात एडविना माउंटबेटन को पत्र लिखकर दिन की घटनाओं और फैसलों की जानकारी देते थे, क्या यह देशद्रोह नहीं है? राहुल गांधी को भी इसकी जानकारी लेनी चाहिए।
उन्होंने इस आरोप का भी खंडन किया कि स्वतंत्रता सेनानी सावरकर को पेंशन दी जा रही थी।रंजीत सावरकर ने राहुल गांधी के आरोपों के संबंध में अपने सभी उत्तरों के दस्तावेजी संदर्भ भी प्रस्तुत किए।
इसमें औपनिवेशिक सचिव को गांधी का पत्र, अंडमान में दंड निपटान, जालिनवाला बाग पर गांधी का बयान, नाभा जेल में जवाहरलाल नेहरू, वाई.डी. फड़के की किताब में सावरकर के निर्वाह भत्ते का संदर्भ, गांधी के भत्ते की बैलेंस शीट और अन्य – विवरण सभी राजबंदियों की रिहाई इस उद्देश्य के लिए सावरकर की मांगों के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय का 1918 पत्र, जवाहरलाल नेहरू द्वारा अंग्रेजों को लिखा गया 1948 का पत्र, भारत में अंग्रेजों को गांधी का पत्र, जवाहरलाल नेहरू को मोतीलाल नेहरू का पत्र, रक्षा मंत्री का पत्र आदि शामिल हैं। कतरनों, पत्रों की प्रतियां।
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