शिवसेना ने सरकार बनाने के दावे को खारिज करने वाले राज्यपाल भगत सिंह खंडूरी के निर्णय के खिलाफ 12 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. तर्क यह कि शिवसेना को महामाहीम राज्यपाल ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने और बहुमत प्रदर्शित करने के लिए मांगे गए तीन दिन का समय देने से इनकार कर दिया।
याचिका में कहा गया है कि किसी भी दल के पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत है या नही यह राज्यपाल तय नहीं कर सकते है. बहुमत परीक्षण के लिए सदन तल एकमात्र ‘संवैधानिक रूप से संगठित मंच’ है।
इसके साथ याचिका में लिखा है, कि शिवसेना चौदहवीं महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, 2019 में दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में उभरी है, और वह महाराष्ट्र के माननीय राज्यपाल की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाइयों को चुनौती दे रही है। जिसमे माननीय राज्यपाल ने शिवसेना (याचिकाकर्ता) को सरकार बनाने के दावे के लिए तीन दिन का समय देने से इंकार कर दिया
याचिका में कहा गया है, कि माननीय राज्यपाल का ११ नबम्बर की शाम शिवसेना को सुनाया गया निर्णय असंवैधानिक, अनुचित और जल्दबाजी में लिया गया हैं और इसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले द्वारा निर्धारित कानून का पूरी तरह से उल्लंघन किया है
किसी भी दल के पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत है या नही यह राज्यपाल तय नहीं कर सकते है. बहुमत परीक्षण के लिए सदन तल एकमात्र ‘संवैधानिक रूप से संगठित मंच’ है। इसके अलावा, याचिका के अनुसार सरकार का गठन लोकतंत्र में एक पवित्र राजनीतिक प्रक्रिया है और माननीय राज्यपाल सरकार बनाने से किसी राजनीतिक दल को रोक नहीं सकते हैं।
याचिका के अनुसार संवैधानिक अभ्यास के अनुसार, राज्यपाल का कर्तव्य है कि वे राजनीतिक दलों को सरकार के गठन के लिए आवश्यक समय सीमा दे. और महामाहीम राज्यपाल केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में कार्य नही करे. और सरकार बनाने के लिए किसी भी दावे को अस्वीकार करने के निर्णय लेने से पहले राजनीतिक संगठनों को उचित समय दे
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