(कर्ण हिंदुस्तानी )
हिंदुस्तान का इतिहास गवाह है कि जब जब देश पर कोई विपत्ति आयी है खालसा पंथियों ने अपनी जान पर खेल कर देश को बचाया है। आज़ादी की जंग में सबसे ज्यादा कुर्बानियां देने वाली सिख कौम आज इतनी ज्यादा भुलक्कड़ कैसे हो गयी ? जिन गुरुओं ने मुगलों से लड़ने में अपने परिवार की भी परवाह नहीं की और हंस कर उनके बच्चों ने भी अपनी जान कुर्बान कर दी। उन गुरुओं की सीख का भी अब ध्यान विसर गए। अपनी ताक़त का अंदाज़ा भूल कर आज सिख कौम कांग्रेस और चंद मुसलमानों के हाथों का खिलौना बन कर न्याय मांग रही है। याद करो गुरुओं के सिखों जब इंदिरा गाँधी की हत्या की गयी थी तब इन्हीं कोंग्रेसियों ने तुम्हारे बंधुओं को – औरतों को – बहनों को नवजात बच्चों को टायर में डाल कर ज़िंदा जला दिया था। यद् करो उन मुगलों को जिन्होंने छोटे – छोटे बच्चों को ज़िंदा दीवार में चुनवा दिया था । याद करो जब तपते हुए तवे पर बैठाकर मार दिए गए थे तुम्हारे पुरखे। याद करो जब हिन्दुओं की रक्षा के लिए गुरुओं ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। याद करो अपना वैभव जो कहता है सिख कौम कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाती। याद करो खालसा पंथी लंगर लगाता है , हर कौम को खिलाता है। मगर अब हालात क्या हैं किसान आंदोलन के बहाने सिख कौम को लंगर खिलाने वाले पैदा हो गए हैं। यह देश खालसा पंथियों की वीरता की गाथा गाता है। अपनी आन – बान और शान को भूलकर अपना हक़ मांगने वाले पंजाब के किसान भाइयों से मेरा निवेदन है किसी राजनीतिक दल अथवा मुगलों की औलादों के संगठन के हाथ का खिलौना मत बनो। यह लोग आपका शौर्य मिटा देंगे। मुद्दे को समझना सीखिए , यह एक साज़िश है गौरवशाली कौम को बदनाम करने की। इस साज़िश को नाकाम करो और सकारात्मक विचारधारा से नए कृषि बिल से समझो।अंत में बस इतना ही मैं कहूंगा , मिटने ना पाए तुम्हारे शौर्य की गाथा
झुकने ना पाए कभी तुम्हारा माथा।
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