विगत दिनों कल्याण रेलवे स्टेशन पर बाहर गांव से आने वाली गाड़ियां खासकर हजरत निजामुद्दीन से मुंबई आने वाली राजधानी गाड़ी के समय पर रेल पुलिस कर्मी यात्रियों के बैग चेक करते हर रोज देखे जा सकते हैं। जिससे रेल यात्रियों को निरंतर प्रताड़ित होना पड़ता है।
सार्वजानिक रूप से खुले स्टेशन पर रेल पुलिस द्वारा सादी वर्दी मे या फिर यूनिफॉर्म मे यात्रियों कि झड़ती या फिर उनके सामान की झड़ती लेने से वैध टिकट होने के वावजूद यात्री अपने आप को अपमानित सा महसूस करते है। और उन्हे रेलवे कानून कि जानकारी नहीं होने या फिर अपने गंतव्य पर जाने कि जल्दी के कारण वे इन ज्यादतियों का विरोध नहीं कर पाते है।
मध्य रेलवे के विभिन्न रेलवे स्टेशनो पर आधुनिक CCTV कैमरा
अनेक जानकार यात्री को रेल के अधिकार कि जानकारी भी होती होगी लेकिन शायद समयाभाव या कौन इस नये पचड़े मे पड़े की सोंच के तहत उचित प्लेटफॉर्म पर इसकी शिकायत भी नहीं करते है।
लेकिन सवाल यह उठता है कि रेल पुलिस कर्मी किस अधिकार से वैध टिकट यात्रियों के बैग सार्वजनिक रूप से चेक करते है। उन्हे किसने खुले प्लेटफार्म पर यात्रियों का सामान चेक करने की अनुमति दी है।
पहली बात तो यह है कि सभी रेल पुलिस कर्मी को यूनिफॉर्म पहनकर और नाम की प्लेट एवं परिचय पत्र लगा कर यात्रियों को चेक करने के लिए रोकना चाहिए, जबकि कुछ सिपाही सादे कपडों मे भी यात्रियों को रोक कर सार्वजनिक रूप से चैक कर रहे है।
कल्याण रेलवे प्लेटफार्म से आरपीएफ कार्यलय हटाने से यात्रियों को असुविधा
जबकि रेलवे के कानून के जानकार के अनुसार यदि रेलवे पुलिस को किसी यात्री पर शक है तो, उसको भी जी.आर.पी. आर पी एफ ऑफिस या स्टेशन प्रबंधक के कार्यालय में किसी सक्षम अधिकारी के सामने ले जाकर चेक करना चाहिए।जिससे यदि कुछ आपत्तिजनक वस्तु मिलती है तो उसका उपस्थित अधिकारी जिसके सामने बैग खोला गया है वह गवाह बन सके।
लेकिन इन रेल पुलिस कर्मियों का मकसद तो कुछ और रहता है और यात्रियों कि जांच के दौरान कुछ आपत्तिजनक सामान मिलता है । तो उसे वे प्लेटफार्म पर ही निपटा लेते हैं। अनेक भुक्तभोगी यात्रियों के अनुसार जांच के दौरान रेल पुलिस संबंधित यात्रियों से बहुत गंदा व्यवहार करते है।
उनके बैग के एक एक सामान के बारे मे पूछते है और बैग मे कोई कीमती सामान जैसे कैमरा, मोबाईल, घड़ी, पत्नी या परिवार के लिए खरीदे गए गहना मिल जाता है। तो रेल पुलिस यात्री से उन सामानो का बिल मांगते है ।
और यात्री किसी सामान का बिल दिखाने से चूक जाता है, नहीं दिखा पाता है तो रेल पुलिस उस यात्री से जैसा व्यवहार चोर के साथ पुलिस करती है, वैसा व्यवहार उस यात्री के साथ किये जाने के अनेक उदाहरण है।
अनेक मामले मे यात्रियों द्वारा विरोध किये जाने पर यात्रियों के साथ मारपीट किये जाने से भी रेल पुलिस नहीं हिचकती है। और उचित जानकारी के आभाव मे यात्री अपने ऊपर हुए अन्याय की शिकायत भी नहीं कर पाते है।
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