मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान परिषद में लक्षवेधी का उत्तर देते हुए बताया कि कोकण रेलवे महामंडल को लगातार घाटा सहना पड़ रहा है और आवश्यक निवेश के लिए धन उपलब्ध नहीं है। इसलिए, केंद्र सरकार ने कोकण रेलवे महामंडल को भारतीय रेलवे में विलय करने का प्रस्ताव रखा था।
यह महामंडल चार राज्यों के सहयोग से स्थापित किया गया था। इनमें से केरल, कर्नाटक और गोवा ने पहले ही इस विलय को मंजूरी दे दी थी, और अब महाराष्ट्र ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।
दुहरीकरण, भूस्खलन रोकथाम के उपाय और दुर्घटनाओं को टालने के लिए आवश्यक सुविधाओं के निर्माण हेतु बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है, जो कोकण रेलवे महामंडल के लिए संभव नहीं है।
इसलिए, विलय के बाद भारतीय रेलवे आधिकारिक रूप से इन कार्यों में निवेश करेगा। रेलवे लाइन का दुहरीकरण, दुर्घटना रोकथाम के उपाय, स्टेशन सुधार और आधुनिकीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विलय के बाद भी ‘कोकण रेलवे’ नाम बरकरार रहेगा, जिसे केंद्र सरकार ने भी मंजूरी दी है। महाराष्ट्र सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को सूचित किया जाएगा।
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