कल्याण ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र में ६० प्रतिशत से ज्यादा मतदाता उत्तर भारतीय है. यहाँ वर्षो से हिंदी भाषियों के हित के लिए दिन रात एक कर निरंतर कार्यरत रहने वाली संस्था हिंदी भाषी जनता परिषद् की पूरी टीम हिंदी भाषी मतदाताओ को एकजुट रखने का काम कर रही है वहि इस क्षेत्र में कुछ हिंदी भाषी छोट भैया नेता महज कुछ रुपयों के लिए अपनी डफली अपना राग के तर्ज पर हिंदी भाषियों को गुमराह कर रहे हैं ऐसे में इस चुनाव में भी एक बार फिर साबित हो जाएगा कि हिंदी भाषियों के बिच में कितना भी सेवा भाव के कार्यक्रम किये जाए. समय आने पर इन्हें एकजुट करने के प्रयास बौने साबित हो जाते है.
डोम्बिवली की हिंदी भाषी जनता परिषद् संस्था के लोग वर्षो से निस्वार्थ भाव से डोम्बिवली के साथ इसके ग्रामीण क्षेत्रो में रहने वाले हिंदी भाषियों के हित के लिए काम करते आरहे है. समाज की अच्छी पहचान स्थानीय स्तर के लोगो के बिच रहे इसके भी निरंतर प्रयास संस्था द्वारा किये जाते है.इस दौरान उन्हें समाज के लोगो को आने वाली समस्या के लिए भी स्थानीय स्तर के नेताओं से अच्छे सम्बन्ध बनाये रखने पड़ते है. और हिंदी भाषी जनता परिषद् के पदाधिकारी समाज के लोगो के बुरे वक्त में काम आने वाले राजनेताओ को या फिर उनके राजनैतिक दल को समर्थन देकर अपने उपर किये गए एहसान का बदला चुकाता है.
लेकिन चुनाव के दौरान ही क्षेत्र में अनेक नए नेता पैदा होजाते है जो सिर्फ पैसे के लिए ही मैदान में आते है और हिंदी भाषियों को गुमराह करते है.उन्हें समाज हित से कोई लेना देना नही. उन्हें सिर्फ पैसे से मतलब रहता है. ऐसे लोग को हिंदी भाषी समाज के लिए खतरा माना जाना चाहिए. क्योकि इससे उस हिंदी भाषी जनता परिषद् संगठन की विश्वनीयता पर सवाल उठेगा. बरसाती मेंढक की तरह उगे इन लोभी और स्वार्थी नेताओं का कुछ नही बिगडेगा.
ऐसे में हिंदी भाषी मतदाताओ को चाहिए की वे सूझ बुझ कर काम करे. सिर्फ चुनाव के समय ही पैदा होने वाले ऐसे स्वार्थी नेताओं से यथा सम्भव दुरी बनाए रखे और फिर भी अगर वो जान नही छोड़ रहे है तो फिर उन्हें सबक सिखाया जाना चाहिए. मतलब उनकी पूरी बात में हां में हां मिलाया जाये और मतदान के दौरान सही काम किया जाये. वैसे भी हर समझदार हिंदी भाषी यह बखूबी जानता है की महाराष्ट्र में कौन सी पार्टी हिंदी भाषियों की हितैषी है और कौन दुश्मन और हिंदी भाषी समाज यह भी बखूवी समझाता है की उसे किसे मतदान करना है.
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