(कर्ण हिन्दुस्तानी )
साल दर साल विश्व में उष्णता यानी कि गर्मी बढ़ती ही जा रही है। हर साल हमें महसूस होता है कि इस साल गर्मी पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। हम आपसी बहस में इस गर्मी के उपायों पर विचार विमर्श तो करते हैं लेकिन उन पर अमल नहीं करते। हम बढ़ती गर्मी के लिए एक दूसरे पर दोषारोपण तो करते हैं लेकिन खुद को दोषी मानने को तैयार नहीं हैं। क्योंकि हम मान चुकें हैं कि एक हमारे प्रयास करने से कुछ भी नहीं होने वाला है।
जबकि ऐसा नहीं है। हम यदि किसी भी तरह के प्रयास किसी भी क्षेत्र में करेंगे तो देर से ही सही मगर कुछ लोग उस प्रयास के साथ जुड़ जाएंगे और अकेला चलने वाला व्यक्ति कारवाँ का संचालक बन सकता है। हर साल अप्रैल माह के पश्चात मई माह सभी को उमस और भीषण गर्मी का ना भूलने वाला एहसास दिलाता है। हम किसी तरह से मानसून अच्छे होने की कामना करते हुए मानसून आने पर सबकुछ भूल जातें हैं।
बस यही बात है कि विश्व में भू जल का स्तर दिन ब दिन कम होता जा रहा है। हम पर्यावरण की ओर अनदेखी कर रहे हैं। हम करोड़ों रुपयों के घर खरीद रहे हैं मगर उससे भी ज्यादा कीमती पर्यावरण को नज़रअंदाज़ करते जा रहे हैं। हमें वातानुकूलित घर में रहना अच्छा लगता है मगर हमने कभी यह नहीं सोचा कि हमारे घरों में लगे वातानुकूलित यंत्र से आस पास का पर्यावरण किस तरह से प्रभावित हो रहा है। हम अपनी गगन चुम्बी इमारतों की बालकनी में तमाम साज़ सज्जा का सामान रखते हैं मगर दो गमले जिनमें पर्यावरण को संतुलित रखने वाले पौधे लगाने में हिचकिचाते हैं।
आज की तारीख में देश का लगभग हर कस्बा सीमेंट की सड़कों और सीमेंट के ही गटर्स से पट चुका है। ऐसे में ज़मीन में जल का प्रवेश ही नहीं हो पा रहा है। जब ज़मीन में जल का प्रवेश नहीं होगा तो स्वाभाविक है कि भू जल विरहित होती जाएगी और ज़मीन के गर्भ में छिपे तमाम खनिज पदार्थों में एक प्राकृतिक प्रक्रिया शुरू होगी जो भूमि के बाहरी भाग को भीषण उष्णता प्रदान करेगी।
कई देशों में ज्वालामुखी फटते हैं , लावा दूर – दूर तक फ़ैल जाता है। ऐसे प्रदेशों में पहले से पर्यावरण का ध्यान नहीं रखा गया और आज नतीज़ा सबके सामने है। हमें यदि इस भीषण गर्मी से हमेशा के लिए निजात पानी है तो सबसे पहले खुद के घर से पहल करनी होगी। अपने आसपास के परिसर को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अपने स्तर पर पेड पौधे लगाने होंगे , उन पेड़ पौधों को सींचना होगा , उनकी देखभाल उचित तरीके से करनी होगी।
साथ ही जहां तक हो सके सी एन जी वाले वाहनों का इस्तेमाल करने की आदत डालनी होगी। हमें लोगों को वृक्ष लगाने और उनको पालने पोसने के लिए जागृत करना होगा। पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेना होगा। इतना ही नहीं यदि हम भू जल के कम होते स्तर के बारे में लोगों को जागृत कर सकेंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगीं। यदि हम आज ना सम्भले तो आने वाले समय में पानी की एक एक बूँद के लिए तरसना पडेगा। इतना ही नहीं सांस लेने के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। हमें अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी निभानी ही होगी। वरना आने वाला समय हमसे जीने का हक़ छीन लेगा और इसके ज़िम्मेदार हम खुद ही होंगे।
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