संतोंने गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना के साथ वर्ष 1951 का मंदिर कानून हटाने को कहा !
आंदोलनमें भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने हेतु संतोंकी घोषणाए ।
प्रयागराज – कुम्भ में साधू-संत एवं हिन्दू संगठोनों ने एकत्रिक आकर गो, गंगा और देवालय की रक्षा हेतु काली मार्ग-संगम लोअर मार्ग के चौराहे पर राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन किया । इस में संपूर्ण भारत में गोवंश की रक्षा के लिए राष्ट्रीय गोरक्षा आयोग बने । देवनदी गंगाजी की रक्षा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘600 कि.मी. लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे’ योजना निरस्त हो तथा हिन्दुआें के मंदिरों के शासकीय अधिग्रहण के लिए बनाया गया ‘दी हिन्दू रिलीजियस चैरिटेबल एंडोमेन्ट ऐक्ट 1951’ को हटाने की प्रमुख मांग केंद्र सरकार सें की गई । इस बीच संतों द्वारा ‘जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम्’ का नारा देते हुए संतोंने भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की बात कुम्भ में कही ।
हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन में साधु-संत, श्रद्धालु, धार्मिक एवं हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता सम्मेलित हुऐ थे । इस में गोंदिया के महंत रामग्यानीदासजी महाराज, अयोध्या तपस्वी छावनी के महंत परमहंसदासजी महाराज, श्री हिन्दू तख्त पंजाब के स्वामी चैतन्यगिरी महाराज, वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र के हिन्दूभूषण श्याम महाराज, जुना अखाडे के अवधेशगिरीजी महाराज, नाथ संप्रदाय के रामस्वरूपनाथ महाराज, महानिवार्णी अखाडे के दिव्येश्वर चैतन्य महाराज, जम्मू-कश्मीर के महंत राजेंद्रगिरी महाराज, शिवसेना के प्रयागराज शहरप्रमुख शिवविशाल गुप्ता, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगलेजी, सनातन संस्था के पू. नीलेश सिंगबाळ और सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता चेतन राजहंस का सहभाग था ।
अयोध्या कें महंत परमहंसदास महाराज ने कहा की, विश्व में एक भी हिन्दू राष्ट्र नही है । इसलिए सनातन धर्मी भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना चाहिए । ऐसा करने सें विश्व की कोई शक्ति हमे रोक नही सकती । गोंदिया से आये महंत रामग्यानीदासजी महाराज ने कहा की, केंद्र सरकार ने बजट में ‘राष्ट्रीय कामधेनू आयोग’ स्थापित करने की घोषणा की है । मात्र यह आयोग केवल गोपालन करनेवाले व्यक्तीओ लाभदायी को है । इस सें संपूर्ण गोवंश हत्या बंदी नही होगी । इसलिए राष्ट्रीय गोरक्षा आयोग स्थापित होना चाहिए ।
हिन्दू जनजागृति समिति के सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगले ने कहा, केंद्र सरकार के ‘दी हिन्दू रिलीजियस चैरिटेबल एंडोमेन्ट ऐक्ट 1951’ के कारण उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित अनेक राज्यों के मंदिरों का सरकार द्वारा अधिग्रहण किया गया है । इन मंदिरों की दान राशि सरकारी कोष में जमा हो रही है । यह दान राशि भ्रष्टाचार का साधन बन रही है । विश्व के कोई भी लोकतांत्रिक तथा सेक्युलर देश में धार्मिक संस्थाओ का सरकार द्वारा नियंत्रण नही किया जाता । मात्र भारत में धार्मिक स्वतंत्रतता के विरुद्ध आचरण हो रहा है । मंदिरों का अधिग्रहण करनेवाली सरकार मस्जिद एवं चर्च को नियंत्रण में नहीं लेती है । यह धार्मिक भेदभाव है और समानता के तत्त्व के विरोध में है
सनातन संस्था के प्रवक्ता चेतन राजहंस ने कहा, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 600 कि.मी. लंबा ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ बनाने की घोषणा की है । मात्र इलाहाबाद हायकोर्टने पर्यावरण के कारण वर्ष 2007 में तत्कालिन मायावती सरकार की 1100 कि.मी. लंबा ‘गंगा एक्स्प्रेस-वे’ परियोजना को स्थगित किया था । अब की सरकारने भी ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ की परियोजना के कारण गंगा नदी, पर्यावरण तथा नागरी जीवन को किसी भी प्रकार से आहात न होने की निश्चिती देनी आवश्यक है । अन्यथा यह संपूर्ण परियोजना निरस्त करनी चाहिए । आंदोलन के बाद हिन्दू संगठन एवं संतो द्वारा प्रयागराज में कुम्भ मेला प्राधिकारण के अतिरिक्त जिलाधिकारी दयानंद प्रसाद की प्रत्यक्ष भेट कर उन्हे गो, गंगा एवं देवालय रक्षा हेतु तीन ज्ञापन दिये गये ।
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