मुंबई, दि. 23
महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) के तहत शहर में उपकर भवनों के पुनर्विकास को पूरा करने का रास्ता साफ हो गया है।
पुरानी इमारतों के पुनर्विकास के लिए म्हाडा अधिनियम में नए संशोधन 79 (ए) और 91 (ए) को शामिल करने के लिए मंगलवार को एक सरकारी निर्णय जारी किया गया।
इसके लिए म्हाडा अधिनियम में संशोधन किया गया है और इन नए संशोधनों के कारण किराया बकाया रखने वाले डेवलपर्स के खिलाफ मामला दर्ज करने और परियोजनाओं को छोड़ने वाले डेवलपर्स को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जा सकती है। यदि नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किया जाता है कि इमारत खतरनाक है या बिल्डिंग मरम्मत और विकास बोर्ड इमारत को खतरनाक घोषित करता है, तो इमारत मालिक को तीन महीने के भीतर नोटिस पर कार्रवाई करनी होगी। यदि नहीं, तो भवन एवं मरम्मत बोर्ड को इस नई धारा के तहत भवन मालिक को नोटिस जारी करना होगा और निवासियों की 51 प्रतिशत सहमति के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत करने के बारे में मुख्य प्राधिकारी को सूचित करना होगा। यदि ऐसा प्रस्ताव छह महीने के भीतर प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो किरायेदारों की नियोजित सहकारी आवास समिति को ऐसा प्रस्ताव प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया जाना चाहिए। यह स्पष्ट किया गया है कि यदि हाउसिंग सोसायटी प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं करती है, तो बिल्डिंग एंड रिपेयर बोर्ड को म्हाडा के माध्यम से संबंधित भवन का पुनर्विकास करना चाहिए।
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