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राकपा को मुसलमानों के रहनुमा बनने का प्रयास, उसके लिए गले की हड्डी

(राजेश सिन्हा)
एक समय था जब पूरे देश के साथ महाराष्ट्र में भी मुसलमानों का ज्यादातर वोट कांग्रेस पार्टी को ही जाता था । अन्य दल के लाख प्रयास के बावजूद यह समाज हमेशा से कांग्रेस का वोट बैंक रहा है।

लेकिन स्थितियां पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी के समय से ही बदलने लगी और कांग्रेस में बिखराव का  शुरू हुआ।

देशभर के राज्यों में अलग-अलग पार्टी और फिर जातिगत राजनीति के साथ मुसलमान समुदाय के वोटबैंक को भी अपनी तरफ खींचने की कवायद जोर शोर से होने लगी

बिहार, उत्तर प्रदेश इसका सबसे अच्छा उदाहरण है इन सबके बावजूद महाराष्ट्र में यह समाज हमेशा से कांग्रेस का वोट बैंक रहा है।

कांग्रेस से अलग होने के साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने शुरुआत से इस समाज को अपने तरफ खींचने की लगातार कोशिश की और इसी अभियान के तहत इस समाज के अनेक लोग पार्टी के प्रमुख पद पर भी शुरुवात से बिठाए गए और आज इस आघाडी सरकार में मंत्री पद पर भी है।

लेकिन आजकल राज्य की स्थिति में बढ़ते मौसमी तापमान के साथ राजनीति का भी पारा अपने चरम पर पहुंचा हुआ है।

मामला धार्मिक होने के कारण सत्ता में विराजमान राष्ट्रवादी कांग्रेस के लिए पूरा मामला गले की हड्डी के जैसा हो गया है पार्टी नेतृत्व को यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या निर्णय लें।

इन दिनों हर तरफ रामनवमी जुलूस में देशभर में हुए दंगे, हनुमान चालीसा पठन, के साथ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने उनके लिए एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।

पिछले दिनों थाने में आयोजित अपने सभा में मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य सरकार को एक अल्टीमेटम दिया है। उनके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर के मस्जिदों पर अवैध रूप से लगाए गए लाउडस्पीकर को हटाने का निर्देश दिया हुआ हैै।

बावजूद इसके राज्य में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है राज ठाकरे ने राज्य सरकार को 3 मई तक का अल्टीमेटम दिया है

इस दौरान राज्य सरकार अवैध मस्जिदों से लाउडस्पीकर नहीं हटाती है तो राज्य भर के मनसे कार्यकर्ता अपने अपने क्षेत्र के अवैध लाउडस्पीकर वाले मस्जिदों के सामने जाकर नमाज के वक्त ही हनुमान चालीसा पढ़ेंगे।

यह मामला राष्ट्रवादी कांग्रेस के लिए गले का फांस बन गया है।इस मामले में आग में घी डालने का काम उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ सरकार ने किया है।

2 दिन पहले ही राज्य सरकार ने अपने प्रदेश में मस्जिदों पर बज रहे सभी अवैध लाउडस्पीकरो को हटाने का आदेश जारी किया और कल राज्य के सभी थाना अधिकारियों ने अपने दल बल के साथ जाकर वहां के मस्जिदों से अवैध लाउडस्पीकर हटवा दिए।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे अपने आंदोलन में सर्वोच्च न्यायालय का जिक्र करते हैं और राज्य मैं यह कानून का पालन नहीं हो रहा यह बात भी जगजाहिर है।

दूसरी तरफ राकांपा नेता मुसलमानों को नाराज किए बगैर इस मामले को सुलझाने के मशक्कत में लगातार किरकिरी झेल रहे है

इसी मुद्दे पर राज्य सरकार ने 2 दिन पहले सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया। और उसमें उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करने का एकमत से निर्णय होने का बात कही।

लेकिन इस सच्चाई को कोई राकपा नेता सार्वजनिक रूप से बोलने को तैयार नहीं है प्रदेश के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल सार्वजनिक रूप से बार-बार कह रहे हैं कि राज्य भर के मस्जिदों पर अनुमति लेकर बजा रहे लाउडस्पीकर को नहीं हटाया जाएगा।

लेकिन वह यह नहीं जोड़ पारहे हैं कि जिन मस्जिदों पर अवैध रूप से लाउडस्पीकर बज रहा है उसे हटाना सरकार की मजबूरी है।और देर सवेर राज्य के मस्जिदों पर अवैध रूप से बजाया जा रहे लाउडस्पीकर भी हटा दिए जाएंगे।

कुछ ऐसी ही भाषा राकांपा के दूसरे नंबर के नेता अजित पवार भी बोल रहे हैं। सामाजिक सौहार्द की बात जोड़ते है लेकिन सच नही बोल पा रहे है।

पहले ही देशभर में राकांपा कोटे से मंत्री रहे नवाब मलिक के मामले में पार्टी को खासी किरकिरी हो रही है।

माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की बहन से संपत्ति खरीदने के मामले में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ईडी द्वारा दोषी पाए गए हैं और फरवरी से ही जेल में बंद है

लेकिन राकपा के वरिष्ठ नेतागण मलिक से ना तो मंत्री पद का इस्तीफा लिया है, नाही उन्हें मंत्री पद से हटाया है।

केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के पुत्र निलेश राणे ने तो राज्य सरकार पर 2 दिन पहले ही गंभीर आरोप लगाया है उनके अनुसार जेल में से ही नवाब मलिक अपने मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं और 2 दिन पहले ही उन्होंने एक कैबिनेट निर्णय पर हस्ताक्षर किया है।

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