केतकी और स्वरा मिलेकी ने किया संस्कृति की विरासत का खुलासा!
डोंबिवली, दि . 31
पोवाड़ा से लेकर लावणी तक और अंग्रेजी गानों से लेकर स्पुरती गीत तक, डोंबिवली ने रविवार को विभिन्न प्रकार के गीतों का अनुभव किया जो उनकी संस्कृति का हिस्सा हैं। मौका था स्वरतीर्थ सुधीर फड़के स्मृति समिति द्वारा आयोजित एकेएस क्रिएशन्स द्वारा निर्मित कार्यक्रम ‘केतकीश्वर’ का।
मिलेकी कार्यक्रम में ‘सारेगामापा ‘ फेम स्वरा जोशी और गायिका केतकी भावे-जोशी ने शिरकत की। अभिजीत जोशी द्वारा निर्मित और परिकल्पित। कार्यक्रम की शुरुआत राग विभास की रचना से हुई। इसके बाद स्वरा और केतकी ने मिलकर तराना परफॉर्म किया। दोनों ने जिवाल्गा जिवलगा कधी रे येशील तू, ससा तो ससा , वासाचा पयला,फड सांभाळ तुऱ्यालाकढ़ी जैसे एक से एक एविट पेश किए। कार्यक्रम का समापन छत्रपति शिवाजी महाराज पर पोवाड़ा के साथ हुआ।
कार्यक्रम का संगीत एवं आर्केस्ट्रा संयोजन कमलेश भड़कमकर का था। दीप वेज़, झंकार कनाडे (कीबोर्ड), प्रणव हरिदास (बांसुरी), हनुमंत रावड़े (तबला), अनिल करंजवकर (पर्क्यूशन), आशीष अरोस्कर (ऑक्टोपॉड) ने संगीत तैयार किया। ये बयान था मयूरेश साने का।
प्रवीण दुधे द्वारा प्रस्तुत, जन भागीदारी के माध्यम से सियाचिन में भारतीय सैनिकों के लिए ऑक्सीजन संयंत्र बनाने वाली सुमेधा चिथड़े को सम्मानित किया गया, जबकि स्वरा जोशी को कुलकर्णी ब्रदर्स के श्रीपद कुलकर्णी द्वारा विशेष सम्मान दिया गया।

