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एमएसईबी और महावितरण में समन्वय नही होने से ग्राहकों का करोडो का चुना.

पिछले कई वर्षों से महाराष्‍ट्र राज्‍य विद्युत बोर्ड ने बिलिंग का काम महावितरण नामक संस्‍था को सौप दिया है तथा रीडिंग लेने से लेकर बिल भुगतान तक  की प्रक्रिया महावितरण कंपनी कर रही है। यह संस्‍था ऑफ लाइन एवं ऑन लाइन दोनों माध्‍यमों से कार्य कर रही है। परंतु दोनों विभागों में तालमेल सही न होने के कारण उपभोक्‍ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मसलन, समय पर रीडिंग न लेने के कारण रेट का रेंज बढ़ जाना, भु्गतान किए जाने के बावजूद रीडिंग में दर्शाया न जाना या उसे नहीं घटाना वगैरह। ऐसी परिस्थितियों में एमएसईबी को कोई नुकसान नहीं है बल्कि सीधे यह उपभोक्‍ताओं को प्रभावित कर रही है। उपभोक्‍ता ने चेक के माध्‍यम से भुगतान तो कर दिया, उपभोक्‍ता के बैंक खाते से रकम डेबिट होकर एमएसईबी के खाते में चली भी गई  परंतु वह एमएसईबी के अभिलेख में नहीं आया और सिस्‍टम में दर्शाया नहीं गया

जिसकी वजह से वह ग्राहक के बिल में ब्‍याज सहित फिर से जुड़ गया। कार्यालय में पूछने पर बताया जाता है कि यह सब कुछ बांद्रा से होता है। कभी कभी तो यह मात्र बिल पर हाथ से लिख दिया जाता है परंतु जब तक यह सिस्‍टम में अपडेट नहीं होता तब तक ग्राहकों को दंड और बकाया सहित बिल आता रहता है। ऐसे मामले कल्‍याण प‍श्चिम स्थित वल्‍लभ टावर्स के सोसायटी बिल में देखा गया है। जब सोसायटी के चेयरमैन ने लिखित शिकायत की तो मामला प्रकाश में आया परंतु खबर लिखे जाने तक इस संबंध में एमएसईबी या महावितरण ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।

एक तरफ एमएसईबी बिलिंग के मामले को महावितरण पर धकेल रहा है तो दूसरी तरफ जब उसकी जिम्‍मेदारियों का एहसास कराया जाता है तो वह मुंह मोड़ लेता है। कल्‍याण के सिंडिकेट इलाके में बिजली आपूर्ति का मेन सप्‍लाई बॉक्‍स खुला हुआ पाया गया है। जिस मुख्‍य सड़क पर साईबाबा मंदिर के पास न केवल स्विच बॉक्‍स खुला है बल्कि सप्‍लाई केबल भी खुला हुआ ऐसे ही जमीन में गिरा पड़ा है। माना कि इसमें करेंट नहीं है लेकिन भूलवश कुछ गड़बड़ी हुई तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता है और जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है।

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