संघ पृष्ठभूमि वाला एकमात्र विधायक नरेन्द्र पवार का टिकट काटना भाजपा के लिए आत्मघाती
कल्याण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन विधायक नरेंद्र पवार को भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा उम्मीदवारी नकारते हुए, यह सीट शिवसेना को देने का फैसला भाजपा के लिए आत्मघाती साबित होगा। कल्याण डोम्बिवली से नरेन्द्र पवार एकमात्र विधायक संघ पृष्ठभूमी से है और उनकी उम्मीदवारी नह्कारना भाजपा के लिए नुक्सान देह साबित होगी.
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवसेना के स्थानीय नेताओं के विरोध के कारण भाजपा शीर्ष नेताओं द्वारा कल्याण पश्चिम सीट शिवसेना को देने की चर्चा आज सोमवार शाम को जोरदार ढंग से हो रही है सूत्रों का मानना है कि कल्याण डोम्बिवली क्षेत्र में शिवसेना के पास सिर्फ डोंबिवली ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र ही है जबकि सांसद यहां से शिवसेना का है ऐसे में बराबरी के लिए शिवसेना के स्थानीय नेताओं ने कल्याण पश्चिम विधानसभा शिवसेना को देने की मांग कर रहे हैं
उल्लेखनीय है कि गत चुनाव विधानसभा चुनाव में शिवसेना और भाजपा दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ी थी जिसमें कल्याण पश्चिम सीट भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र पवार ने जीती थी अब सवाल यह उठता है कि अगर यह सीट शिवसेना को दी गई तो भाजपा के लिए कैसे आत्मघाती साबित होगा
ज्ञात हो कि कल्याण डोम्बिवली के चारों सीट में से तीन पर भाजपा के विधायक हैं इन तीनों विधायक में से कल्याण पूर्व के विधायक गणपत गायकवाड निर्दलीय चुने गए थे बाद में भाजपा में प्रवेश किया वही डोंबिवली पूर्व के विधायक रविंद्र चौहान का वास्ता सिर्फ भाजपा से है इन दोनों विधायकों का कोई संबंध संघ से नहीं रहा है
जबकि नरेंद्र पवार बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने के साथ उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लिए 5 वर्ष पूर्णकालिक रहकर काम किया है ऐसे में यह कहा जा सकता है डोंबिवली में नरेंद्र पवार एकमात्र ऐसे विधायक हैं जिनका वास्ता संघ परिवार से है और अगर उन्हें भाजपा प्रदेश नेतृत्व टिकट नकार देती है तो यह निसंदेह भाजपा के लिए आत्मघाती साबित होगा

