कौन लौटाएगा डोंबिवली को उसका सौंदर्य ?
( कर्ण हिन्दुस्तानी )
महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव नजदीक आते देख डोंबिवली के विधायक (राज्यमंत्री ) जी ने बड़ी – बड़ी घोषणाएं कर सभी का मन मोह लेने का कथित कार्य किया है . इन विधायक महोदय को डोंबिवली का कितने वर्षों का इतिहास पता है शायद कोई नहीं जानता। डोम्बिवली यानी कि सुशिक्षित लोगों का गढ़ , डोम्बिवली यानी कि इतिहास गढ़ने वाले लोगों की नगरी , डोम्बिवली यानी कि हर हिन्दू त्योहार धूम धाम से मनाने वाले नागरिकों का शहर।
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आज से तकरीबन दो दशक पहले तक डोम्बिवली का नाम सबसे सुरक्षित और स्वच्छ शहरों में लिया जाता था। देश में भी डोम्बिवली का नाम बड़े आदर से लिया जाता था। तमाम साहित्यिक , शैक्षणिक लोगों का इसी डोम्बिवली में रहना होता था। फिर चाहे वह विजय तेंदुलकर हों , श. ना. नवरे हो, इशाक मुज्जाबर हो, सुलभा कोरे हों, या फिर हिंदी साहित्य में सुप्रसिद्ध आलोक भट्टाचार्य हों , शिक्षण क्षेत्र में प्रसिद्द सुरेंद्र वाजपेयी हों।
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सभी ने डोम्बिवली का नाम अपने हिसाब से बड़ा किया था। आबा साहेब पटवारी , राम कापसे , जगन्नाथ पाटिल , अशोक राव मोड़क जैसे राजनीती के समर्पित लोगों ने डोम्बिवली का नेतृत्व किया है। तब डोम्बिवली में इक्का दुक्का समस्याओं को छोड़ कर बाकी सब कुछ ठीक था। जनसंघ और बाद में बीजेपी के हाथ में सत्ता रहने के बाद हरिश्चंद्र पाटिल तक सब कुछ ठीक था।
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मगर जैसे ही हरिश्चंद्र पाटिल को नकार कर बाहर से आये और बीजेपी में प्रवेश कर बीजेपी पर मौजूदा कब्ज़ा करने वाले को बीजेपी ने बड़ा किया तब से डोम्बिवली का अस्तित्व ही दांव पर लग गया। डोम्बिवली के विधायक पर एक दो राजनीतिक मामलों के अलावा कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ करता था। मगर मौजूदा समय की बात अलग हो गई है। डोम्बिवली के पुराने बीजेपी कार्यकर्ता हाशिये पर धकेल दिए गए हैं। जो मौजूदा विधायक को शेठ कहेगा वही कार्यकर्ता कहलाएगा बाकी निष्ठावान कार्यकर्ता घर पर भी बैठे। जिसके चलते डोम्बिवली की वह बीजेपी अब खत्म हो गई है
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अब डोम्बिवली की जनता को अपने विधायक को देखने के लिए तरसना पड़ता है। उनको अपने विधायक को मिलने के लिए गुर्गे नुमा सुरक्षा रक्षकों से पहले मिलना पड़ता है , जांच पड़ताल के बाद ही विधायक महोदय अवतरित होते हैं। डोम्बिवली की सड़कों , डोम्बिवली के खेल के मैदान , डोम्बिवली के यातायात उड़ान पुलों के बारे में खुलकर बोलना भी जुर्म माना जाता है। डोम्बिवली की खस्ता हाल और छोटी सड़कों को बनाने का ख्याल विधायक ( माफ़ कीजियेगा राज्यमंत्री ) महोदय को ऐन चुनाव के कुछ दिन पहले ही आता है और बड़े बड़े अवैध होर्डिंग्स लगाकर करोड़ों रुपयों की घोषणा कर दी जाती है।
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जनता को मूर्ख समझ कर राज करने का अनोखा काम स्थानीय राज्य मंत्री महोदय कर रहे हैं। ना ढंग से डोम्बिवली वालों को पेयजल मिल पाता है , ना २४ घंटे बिजली मिल पाती है , ना डोम्बिवली में एक भी चिकित्सा महाविद्यालय है , ना डोम्बिवली में मनपा का अस्पताल ढंग से काम करता है , ना डोम्बिवली में गंदगी उठाने का कोई उचित माध्यम काम करता है , ना डोम्बिवली से फेरीवालों को हटाया जाता है , ना डोम्बिवली के रेलवे स्टेशन पर कोई सुविधा है।
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डोम्बिवली में यातायात समस्या सुलझाने का भी कोई उपाय सामने नहीं दिखता है। पूर्व और पश्चिम की जनता त्रस्त है मगर विधायक महोदय मस्त हैं। डोम्बिवली की पहचान , डोम्बिवली की शान अब लुप्त होती जा रही है मगर विधायक महोदय को कोई चिंता नहीं है क्योंकि उन्हें पता है डोम्बिवली की जनता किसी व्यक्ति विशेष को वोट नहीं करती , डोम्बिवली की जनता कमल को वोट करती है। कमल की डंडी पकड़ कर यदि श्वान भी खड़ा हो जाए तो वह विजयी हो जाएगा।
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डोम्बिवली अब वह डोम्बिवली नहीं रहा, अब डोम्बिवली समस्याओं की नगरी बन गया है। इसका हाल क्या है ? यह खुद बीजेपी के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कुछ माह पहले घोषित कर दिया था। इसके बावजूद मौजूदा विधायक महोदय को शर्म नहीं आयी क्योंकि उन्हें गलिच्छ डोम्बिवली को सुधारना नहीं है उनको तो बस राजनीती करनी है और वह करते आ रहे हैं। डोम्बिवली के गायब हो चुके सौंदर्य से विधायक महोदय को क्या लेना देना ?
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