धनंजय कुलकर्णी को न्यायलिन हिरासत, विरोधियो के दावे की पोल खुली.
(कर्ण हिन्दुस्तानी)
डोम्बिवली के धनंजय कुलकर्णी द्वारा अपने दूकान में कथित तौर पर घातक हथियार रखने के आरोप में मंगलवार को कल्याण सत्र न्यायलय ने उन्हें पुलिस हिरासत से न्यायलीन हिरासत में भेजने का निर्णय दिया.डोम्बिवली क्राइम ब्रांच के प्रमुख संजू जॉन द्वारा “मुंबई आसपास” से बातचीत के दौरान न्यायलय के इस निर्णय की जानकारी दी गई है,
न्यायलय के इस निर्णय से यह तो साफ़ हो गया कि मामले को साजिश के तहत मीडिया ट्रायल कर गंभीर बनाने का पूरा प्रयास किया गया और मीडिया ट्रायल के दबाब में आकर ही पुलिस ने भी निचली अदालत से आरोपी धनंजय को न्यायलिन हिरासत के फैसले को चुनौती देते हुए सत्र न्यायलय का दरवाजा खटखटाया और न्यायलय ने पुलिस की मांग को मानते हुए दो दिन की और पुलिस हिरासत दी, पुलिस की ऐसी तत्परता बहुत कम देखि जाती है,लेकिन मीडिया के लागातार अलग अलग मनगढ़ंत आरोपों के दबाब पुलिस को उपरी अदालत का दरबाजा खटखटाना पड़ा,
लेकिन इस दो दिनों के दौरान पुलिस हिरासत में पुलिस आरोपी धनजय कुलकर्णी से कोई नई जानकारी नही कबुलबा पाई.और नतीजतन मा. सत्र न्यायलय ने पुलिस कस्टडी से न्यायलिन कस्टडी में भेजने का निर्णय सुनाया.जिससे उन्हें जल्द ही बेल मिल सकता है
ज्ञात हो की डोम्बिवली अपराध शाखा के प्रमुख संजू जॉन के नेतृत्व में सात दिन पहले यहा के तिलकनगर स्थित तपस्या गिफ्ट आर्टिकल की दूकान से कथित तौर पर १८० घातक हथियारों का जखीरा बरामद करने का दावा किया था..और इसी आरोप में पुलिस ने दूकान मालिक धनंजय कुलकर्णी को गिरफ्तार भी किया था.पुलिस द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार उन्हें इस दूकान से इतने ज्यादा मात्रा में कथित तौर पर घातक हथियार मिले.
पुलिस द्वारा गंभीर मामला दर्ज करने पर हर तरफ चर्चा का बाजार गर्म था,जहा एक तरफ भाजपा के वरिष्ठ नेतागण अपने कार्यकर्ता कुलकर्णी के लिए खुलकर सामने आने लगे है.वही अन्य राजनैतिक दल के नेता भी इस मामले में कुलकर्णी को नाहक फसाए जाने का खुलेआम आरोप लगा रहे थे
मनसे से कल्याण डोम्बिवली मनपा में विरोधी दल नेता मन्दार हलवे ने यह पूरा मामला राजनितिक प्रतिद्वान्धिता का होने का आरोप लगाते हुए पुरे मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णविस से की है,मुख्यमंत्री ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए इस पुरे मामले के जांच के आदेश दिए थे.
संघ कार्यकर्ता के घर घातक हथियार मिलना विरोधी राजनैतिक दल के साथ मिडिया के लिए भी बड़ी खबर थी और लगातार मीडिया में भी छाई रही,लेकिन एक दिन बीतते बीतते इस पुरे मामले के दुसरे पहलु भी सामने आने लगे,और भाजपा के अनेक नेता गण इस पुरे मामले को एक सोची समझी रणनीती के तहत सिर्फ भाजपा और संघ को बदनाम करने की साजिश करार दे दी थी.
भाजपा प्रदेश सचिव और कल्याण पश्चिम से विधायक नरेंद्र पवार ने इस पुरे मामले को अनावश्यक रूप से विरोधी दल के नेताओं और कुछ मिडिया कर्मियों द्वारा तुल दिए जाने का आरोप लगाया था.उनके अनुसार कल्याण डोम्बिवली में ऐसे गिफ्ट आर्टिकल के एक दर्जन से अधिक दूकान है, जहा ये सब सामान आसानी से मिलते है,और लोग इसे अपने घरो में सजावट के लिए खरीदते है या गिफ्ट में देते है,यहाँ से वरामद १८० कथित घातक हथियारों में से डेढ़ सौ से अधिक छोटे छोटे फाइटर, नॉन चाक़ू, जैसे हथियार है..
उल्लेखनीय है की इस मामले में अखबारों में भी जीतनी मुह उतनी बाते देखने को मिल रही थी,कुछ पत्रकार तो रोज नये नये और बिना सर पैर के खबरे लिख कर मामले की जाँच को लगातार प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे कही किसी दिन किसी अखवार में आरोपी के अन्य राज्यों के हथियार तस्कर से सम्बन्ध होने की सम्भावना व्यक्त की थी तो कुछ लोग आरोपी के दुकान से मराठा तलवार मिलने का तुक्का छोड़ा था,कुछ चैनल पर तो इस मुद्दे को हिन्दू आतंकवाद से जोड़ने की लगातार कोशिश की गयी,
जबकि इस पुरे मामले के जांच कर्ता और डोम्बिवली क्राइम ब्रांच के प्रमुख संजू जॉन ने शुरुवात से ये सब खबरे बेबुनियाद बताईउन्होंने आरोपी से ऐसी कोई जानकारी नही मिलने की बात कही और नाही उन्होंने किसी भी पत्रकार से ये बाते करने की सफाई दी ,मुंबई आसपास से बातचीत करते हुए संजू जॉन ने बताया कि खबरों को चटक दार बनाने के लिए अगर कोई पत्रकार ऐसी कहानी गढ़ता है तो इसके जिम्मेदार वो पत्रकार होंगे.

