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मराठा आरक्षण पर राज्य सरकार की मुश्किल आसान, राज्य पिछड़े आयोग सकारात्मक

महाराष्ट्र राज्य पिछड़े आयोग ने राज्य सरकार को सोपे अपनी रिपोर्ट में मराठा समाज को राज्य में पिछड़ा माना है राज्य पिछड़े आयोग के, इस रिपोर्ट से मराठा समाज को आरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया है. आयोग के इस रिपोर्ट से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सबसे बड़ी राजनीतिक मुश्किल का हल हो गया है. राज्य पिछड़े आयोग की रिपोर्ट में मराठा समाज को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़ा माना गया है. इस के बाद मराठों को राज्य में शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरी में आरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया है.

आयोग के सचिव इस रिपोर्ट को आज राज्य के मुख्य सचिव डीके जैन को सौंप सकते हैं. महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री के अनुसार ‘हम इस रिपोर्ट को मुंबई उच्च न्यायलय में नही सोपेंगे इस पर कैबिनेट मीटिंग में चर्चा करेंगे. हम मराठों को आरक्षण देने के लिए बिल लाएंगे और विधानसभा से कानून पारित करवाएंगे. अगर कोई इस कानून को कोर्ट में चुनौती देगा तो ही हम यह रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे.’

ज्ञात हो कि मराठों के आरक्षण की मांग 1980 के दशक से लंबित पड़ी है. राज्य पिछड़ा आयोग के रिपोर्ट के मुताबिक 25 विभिन्न मानकों पर मराठों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक आधार पर पिछड़ा होने की जांच की. इसमें से सभी मानकों पर मराठों की स्थिति दयनीय पाई गई. इस दौरान किए गए सर्वे में 43 हजार मराठा परिवारों की स्थिति जानी गई. इसके अलावा जन सुनवाइयों में मिले करीब 2 करोड़ ज्ञापनों का भी अध्ययन किया गया. महाराष्ट्र में 1980 के दशक से ही मराठा आरक्षण की मांग उठने लगी थी. तब मराठा कर्मचारियों के नेता अन्ना साहेब पाटिल ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया था. इस मांग को लेकर भूख हड़ताल के दौरान उनकी जान चली गई थी. इसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

 

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