बाघिन अवनी के मामले में भाजपा आक्रमक, वन्य प्राणियों के हमले से ग्रस्त किसानों ने भी खोला मोर्चा.
13 लोगों की हत्या करने वाली बाघिन अवनी की मौत पर महाराष्ट्र के विरोधी दल के साथ सत्ता पक्ष में सहयोगी शिवसेना भी राज्य के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार पर लगातार गंभीर आरोप लगा रही है वहीं बचाव करते करते ऊब चुकी राज्य की प्रमुख सत्ताधारी भाजपा सरकार अब आक्रामक मुद्रा में आ गई है वन मंत्री मुनगंटीवार ने जहां कांग्रेस मुंबई कांग्रेस प्रमुख संजय निरुपम के आरोपों पर उन्हें कोर्ट में घसीटने की चेतावनी दी है वहीं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को इस मामले में बने जांच समिति का प्रमुख बनने का सरेआम न्योता दे दिया है वहि इसी मामले में वन्य प्राणी ग्रस्त हजारो किसानों ने एक दूसरा मोर्चा खोल दिया है। आज 11 नवंबर को वन्य प्राणियों के हमले से ग्रस्त किसानों का विदर्भ के बोरा में विराट सम्मेलन आयोजित कर अवनि से पीड़ित लोगो ने सरकार से जीने का अधिकार माँगा।
ज्ञात हो कि 10 दिन पहले पिछले शुक्रवार को यहाँ के बोंराती के जंगलों में वन विभाग के 200 कर्मचारियों के साथ ढूंढने के दौरान आदमखोर बाघिन अवनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.महाराष्ट्र सरकार के अनुसार सरकार पिछले डेढ़ महीने से इस आदमखोर बाघिन को पकड़ने के फिराक में थी जिसमें उन्हें लगातार असफलता रही थी घटना वाले दिन भी बाघिन अवनी को जीवित पकड़ने के प्रयास में बाघिन ने दो वन विभाग के कर्मचारियों पर जानलेवा हमला किया था, और मजबूरीवस गोली मारी गई
उल्लेखनीय है कि इससे पहले इस आदमखोर बाघिन अवनी ने आसपास के कुल तेरह ग्रामीणों का शिकार कर दिया था और उस आदमखोर बाघिन को जिंदा या मुर्दा पकड़ना सरकार के लिए मजबूरी बन गई थी डेढ़ महीने तक पूरा विपक्ष वे लोग सरकार को बाघिन अवनी द्वारा लगातार ग्रामीणों की हत्या के लिए कोस रहे थे अब बाघिन की हत्या पर सरकार को कटघरे में खडा कर रहे है,
कोई बाघिन अवनी द्वारा मारे गए १३ लोगो के परिवार के बारे में नही बात कर रहा,नाही उस क्षेत्र में कार्यरत वनकर्मियो और ग्रामीणों के जिंदगी और मौत पर बात कर रहा है.आदमखोर बाघिन अवनी अगला शिकार किसका करती इससे भी किसी को लेना देना नहीं.
यही सब नौटंकी देख कर विदर्भ के वन प्राणी हमले से ग्रसित लोगो ने अपने हक की लड़ाई खुद लड़ने की ठान ली है और इसी के तहत आज वन्य प्राणियों के हमले से ग्रस्त किसानों का विदर्भ के बोरा में विराट सम्मेलन आयोजित कर अवनि से पीड़ित लोगो ने सरकार से जीने का अधिकार माँगा।

