मुंबई, दि. 24
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यहां कहा कि सहकारिता आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद सहकारी आंदोलन को नया जीवन मिला है।
मुंबई विश्वविद्यालय और सहकार भारती द्वारा आयोजित ‘लक्ष्मणराव इनामदार मेमोरियल लेक्चर’ में शाह ने ‘आज के संदर्भ में सहकारी आंदोलन’ विषय पर बात की।
मुंबई विश्वविद्यालय के सर कावसजी जहांगीर दीक्षांत समारोह हॉल में आयोजित व्याख्यान में राज्यपाल रमेश बैस, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, कुलपति डॉ. रवींद्र कुलकर्णी, सहकार भारती के अध्यक्ष दीनानाथ ठाकुर और अन्य लोग शामिल हुए।
2014 तक, देश की 60 प्रतिशत आबादी के पास बैंक खाता नहीं था और वह अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई थी। आज इनमें से 60 प्रतिशत लोगों के पास पांच लाख रुपये तक के बैंक खाते, घर, बिजली, पानी और स्वास्थ्य कवर है। शाह ने कहा कि देश के हर व्यक्ति को अर्थव्यवस्था से जोड़ने का एकमात्र रास्ता सहयोग है।
चीनी और दुग्ध क्षेत्रों के अलावा, राज्य में सहकारी समितियों के माध्यम से शहद ग्राम विकसित किए जा रहे हैं और राज्यपाल बैस ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग मंत्रालय के कारण देश की अर्थव्यवस्था 10 ट्रिलियन डॉलर की होगी।
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