(कर्ण हिन्दुस्तानी )
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अब प्रचार समाप्त हो गया है। शनिवार की शाम को प्रचार कार्य थम गया। सोमवार को मतदान होगा और उसके बाद गुरूवार की शाम तक सभी दलों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। मगर इस बार यह चुनाव विभिन्न तरह के मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा। मुद्दे भी ऐसे जो हर किसी को किस्से कहानियों की तरह लगने लगे।
विधानसभा चुनाव के पहले शरद पवार को परिवर्तन निदेशालय का नोटिस काफी चर्चा में रहा और शरद पवार का खुद ही परिवर्तन निदेशालय के दफ्तर जाना सभी जगह चर्चा का मुद्दा बन गया। हालांकि बाद में शरद पवार ने मुंबई पुलिस आयुक्त के कहने पर परिवर्तन निदेशालय के कार्यालय जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। शरद पवार की उम्र और जोश से प्रचार करने की अदा भी चर्चा में रही। साथ ही शरद पवार के भतीजे अजित पवार का इस्तीफा भी चर्चा में आया। इसके बाद पंजाब एंड महाराष्ट्र को ऑपरेटिव बैंक का घोटाला भी आज तक सुर्खियां बटोर रहा है।
इस बैंक के खाताधरकों ने मुंबई के किला कोर्ट में हंगामा करने के साथ – साथ मनसे प्रमुख राज ठाकरे से भी मुलाक़ात की और ठाणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी घेराव किया। इस बार सभी दलों ने अपने कुछ परम्परागत चेहरों को दरकिनार कर दिया । जैसे कि बीजेपी ने सरदार तारा सिंह , विनोद तावड़े , प्रकाश मेहता, नरेंद्र पवार और एकनाथ खड़से जैसे दिग्गजों का टिकिट काट दिया।शिवसेना ने भी टिकिट की मांग करने वाले कई शिवसैनिकों का टिकिट काट दिया जिसके चलते शिवसेना में भी बगावत हुई और कई नगरसेवकों ने शिवसेना का दामन छोड़ दिया। बीजेपी के भी कुछ बागी चुनावी मैदान में ताल ठोक कर खड़े हैं।
ठाकरे परिवार से पहली बार कोई ठाकरे चुनावी मैदान में उतरा और बाला साहेब के पोते आदित्य उद्धव ठाकरे ने मुंबई के वर्ली विधान सभा से नामांकन दर्ज किया। इसी के साथ मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने विरोधी पक्ष में बैठने के लिए वोट मांगने की शुरुवात कर नयी राजनीती की बिसात रखी। कई विधानसभा चुनावों के इन्तजार के बाद पहली बार राकांपा सांसद और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले , दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी , उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या , पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को छोटे – बड़े शहरों में चुनावी प्रचार करते देखा गया।
इसके अलावा स्थानीय मुद्दे भी इस बार जमकर चलते दिखे।
टूटी सड़कें , पेयजल , बिजली की आँख मिचौली और किसानों का कर्ज हमेशा की तरह चर्चा का विषय रहे। ठाणे जिला के कल्याण का पत्री पुल लोगों में उतना ही चर्चित रहा जितना कल्याण का डम्पिंग ग्राउंड अखबारों की सुर्खियां बना। कांग्रेस में संजय निरुपम द्वारा प्रचार ना करने की खबर सुर्खियां बटोरती नजर आयी तो पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपा शंकर सिंह का कांग्रेस को आखिरी जय महाराष्ट्र कहना भी लोगों को अचंम्भित कर गया।
इस बार दलबदल को भी सुर्ख़ियों में रहने का खूब मौक़ा मिला। पूर्व शिवसैनिक और मौजूदा समय में राष्ट्रवादी कांग्रेस के कद्दावर नेता गणेश नाइक का सपरिवार और नगरसेवकों सहित भाजपाई बन जाना भी चर्चित कहानियों में शुमार हो गया। नारायण राणे के बेटे नितेश राणे के स्वाभिमान पक्ष का बीजेपी में विलीनीकरण जहां मीडिया के लिए मुख्य खबर बनकर उभरा
वहीँ हमेशा सुर्ख़ियों में रहने वाले उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र से टाडा आरोपी तथा पूर्व विधायक सुरेश कालानी की पत्नी विधायक ज्योति कालानी का एन सी पी से इस्तीफ़ा देना और फिर एन सी पी से ही चुनावी मैदान में उतरना भी राजनीतिक हलकों में चर्चित रहा। बीजेपी की परम्परागत सीट यानी कि डोम्बिवली विधानसभा क्षेत्र में इस बार मौजूदा बीजेपी विधायक और राज्यमंत्री रविंद्र चव्हाण के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जमकर चर्चा हुई। इस चर्चा से बीजेपी की आम मतदाताओं में काफी फजीहत भी हुई। मगर बीजेपी ने तीसरी बार चव्हाण को टिकिट देकर सुशक्षित मतदाताओं को निराश किया है। कुल मिलाकर वर्ष २०१९ महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अजब – गजब मुद्दों को लेकर कई दशकों तक याद रखा जाएगा।
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