शीतला प्रसाद सरोज
मुंबई। कथाकार बालकृष्णाचार्य महाराज ने कहा कि भक्त अगर सच्चे मन से भगवान को पुकारता है तो भगवान उसकी जरूर सुनते हैं। भक्तों को भगवान कभी निराश नहीं करते।
धार्मिक संस्था जनकल्याण सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से अंधेरी (पू.) के गुंदवली हिल स्थित साईं सेवा संस्थान परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन बालकृष्णाचार्य महाराज ने अश्वत्थामा और उत्तरा प्रसंग की सुंदर शब्दों में वर्णन किया। महाराज ने कहा कि प्रतिशोध की भावना से तिलमिलाए अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे बालक परीक्षित की हत्या करना चाहा। परीक्षित अर्जुन के पौत्र, अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र तथा जनमेजय के पिता थे।
जब ये गर्भ में थे, तब अश्वत्थामा परीक्षित की हत्या की नीयति से ब्रह्मशिर अस्त्र का प्रयोग किया। ब्रह्मशिर अस्त्र भगवान ब्रह्मा के महान अस्त्र ब्रह्मास्त्र के समान शक्तिशाली, अचूक और घातक था। उत्तरा को जब अश्वत्थामा की मंशा का पता चला तो वह भगवान श्रीकृष्ण से अपने गर्भ की रक्षा के लिए गुहार कर कहती है हे प्रभु! अश्वत्थामा के बाण भले ही मुझे मार डाले लेकिन गर्भ में पल रहे मेरे शिशु की रक्षा आप करें। उत्तरा की विनती सुन भगवान श्रीकृष्ण उसके गर्भ में प्रवेश कर जाते हैं और गर्भ में पल रहे उसके शिशु की रक्षा रक्षा करते हैं।
इस अवसर पर रामाश्रय उपाध्याय, मनोज तिवारी, पत्रकार गणेश तिवारी, मायाशंकर पाठक, शोभा यादव, प्यारी देवी यादव,संतोष शुक्ला, श्रेयस यादव सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
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