सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुम्बई से सटे पर्यटन स्थल माथेरान में प्रायोगिक आधार पर ई-रिक्शा शुरू करने की अनुमति दे दी है। यहां ब्रिटिश काल हाथ से चलने वाले ९६ रिक्शा हैं।
माथेरान निवासी और पेशे से रिटायर टीचर सुनील शिंदे ने पहले मुंबई उच्च न्यायालय में और फिर सर्वोच्च न्यायालय में इस बाबत याचिका दाखिल की थी।
जिसमें उन्होंने यहां पुरुषों द्वारा हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शा गाड़ी का प्रयोग मानवीय आधार पर गलत बताया था।और पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल ई-रिक्शा इस क्षेत्र में शुरू करने की मांग की थी
उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश काल से ही माथेरान को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है। इस क्षेत्र में कोई भी पेट्रोल डीजल से संचालित इंजन गाड़ी को चलाए जाने की अनुमति नहीं है।
यहां आने वाले पर्यटकों को यहां के हाथ से खींचे जाने वाले ९६ हाथ गाड़ी रिक्शा या फिर लगभग ४०० घोड़ों पर सवारी कर माथेरान में घुमना पड़ता है।
अब सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण के अनुकूल ई-रिक्शा को माथेरान में प्रयोगात्मक ढंग से शुरू करने की अनुमति दी है।
इससे यहां आने वाले पर्यटकों को सुविधाओं के साथ हाथ से खींच रिक्शा चलाने वाले को मुक्ति मिल जाएगी
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