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देवेन्द्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री, जिम्मेदार कौन ??

देवकी यादव 

राज्य में शिवसेना के बागी विधायकों के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई है। और शिवसेना के एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री और भाजपा से देवेंद्र फडणवीस उप मुख्यमंत्री बन गए हैं।

इस घटनाक्रम के 12 दिन गुजर जाने के बावजूद राज्य भर में ऐसे अनेक भाजपाई हैं जिन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा देवेंद्र फडणवीस को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फैसला पच नहीं पा रहा है।

और हर तरफ “देवेंद्र फडणवीस ही राज्य के मुख्यमंत्री होंगे” की स्थिति होने के बावजूद ऐन वक्त पर इतना बड़ा उलटफेर के लिए जिम्मेदार कौन इस पर भाजपाइयों में अनेक तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।

ज्ञात हो की 21 जून को राज्य में विधान परिषद चुनाव परिणाम घोषणा के कुछ ही घंटों में यह बात फैल गई कि शिवसेना के 19 विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे सूरत में डेरा डाल दिए हैं और उनके तेवर शिवसेना प्रमुख राज्य के तात्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के विरोध में है।

शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे सूरत में है तो यह जगजाहिर हो गया की इस पूरे प्रकरण के पीछे भाजपा है क्योंकि गुजरात में भाजपा ही सत्तासीन है।

और आम लोगों की शंका उस समय दूर हो गई जब ये बागी विधायक यहां से भाजपा शासित राज्य असम के गुवाहाटी ट्रांसफर हो गए।

इधर पहले दिन से ही भाजपाइयों में उत्साह भर गया। उस दौरान अनेक भाजपाइयों से चर्चा के बाद यह साफ समझ में आ रहा था कि राज्य में भाजपा समर्थित सरकार की स्थापना होगी।

जिसमें राज्य के नए मुख्यमंत्री के पद पर भाजपा के देवेंद्र फडणवीस विराजमान होंगे वही उपमुख्यमंत्री पद शिवसेना से बागी विधायक एकनाथ शिंदे को दिया जाएगा।

अनेक भाजपाइयों ने अपने अपने क्षेत्र में देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर बैनर, पोस्टर, आतिशबाजी और मिठाइयां बांटने की तैयारी भी कर ली थी।

भाजपाइयो कि यह तैयारी को झटका 29 जून को देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ राज्यपाल भवन में आयोजित संयुक्त पत्रकार परिषद मे लगा जहां राज्यपाल से मिलने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने आयोजित पत्रकार परिषद में राज्य के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के होने की घोषणा की।

और उन्होंने अपने बारे में इस सरकार को बाहर से पूरी सहायता करने की घोषणा की। उन्होंने एकनाथ शिंदे मंत्रिमंडल में भाजपाइयों के भी शामिल होने की बात कही।

देवेंद्र फडणवीस की यह घोषणा राज्य भर के कट्टर भाजपाइयों के लिए एक सदमे से कम नहीं था। थोड़ी देर में ही यह भी समाचार विभिन्न टीवी चैनलों में दिखाया जाने लगा कि देवेंद्र फडणवीस राज्य के उप मुख्यमंत्री होंगे।

फैसला चाहे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का हो या फिर परिस्थितिजन्य हो, यह निर्णय राज्य भर के ज्यादातर भाजपाइयों के लिए वेदना देने वाला था।

फिर शुरू हुआ मीडिया को पकड़ कर असंतुष्ट भाजपाइयों को सांत्वना और नए उत्साह देने की कवायद, जो हरेक राजनैतिक दल ऐसे धोबी पछाड़ खाने के बाद करते है।

जिसमें जोर शोर से यह प्रचारित किया गया की यह भाजपा की महाराष्ट्र से शिवसेना को खत्म करने की नई चाल है।

चर्चाओं में यह भी सुना गया कि भाजपा देश भर से परिवारवाद की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों को ऐसे ही खत्म करेगी।

राज्य में शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री पद की शपथ लिए हुए 12 दिन बीत गए है।

शुरुआती दिनों में भले ही शिंदे के पक्ष में हलचल दिखी और भले ही शिवसेना के चिन्ह से जीते जनप्रतिनििधि शिंदे गुट के साथ हो,

लेकिन शिवसेना संगठन के लोग शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ शुरुवात से हैं। इसमें शिवसेना नेतृत्व हरकदम फूक फूक कर रखते दिख रहा है।

एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे ने सीधा शिवसेना विरोधी गुट के विरोध में मोर्चा खोल दिया है

वही पक्ष प्रमुख ने शायद संगठन के शिव सैनिकों को कहीं भी विरोधी गुट के शिवसेना विधायक मंत्री या अन्य जनप्रतिनिधियों का विरोध नहीं करने का आदेश दे दिया है।

दबे शब्दों में राजनीतिक विशेषज्ञ इसे पूरे मामले में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की मिलीभगत मानने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।

जबकि भाजपा के विश्वस्त सूत्र के अनुसार यह पूरा मामला उन भाजपा नेताओं ने बिगाड़ा है जिन्होंने शुरुआत से विरोधी गुट से संपर्क रखा।

उनके अनुसार यह जगजाहिर है की शिवसेना के विरोधी गुट के सभी विधायको की भाजपा से नजदीकी इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) के दबाव के कारण हुई।

इनमें से ज्यादातर विधायक पर आय से अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप था और यह ईडी के रडार पर थे। और और शिंदे गुट द्वारा किसी भी तरह की मांग का शर्त रखे जाने की कोई संभावना नहीं थी।

भाजपा के विश्वस्त सूत्र का दावा है की शुरुआत में शिंदे गुट उप मुख्यमंत्री पद पर ही राजी हो गया था। जिसकी चर्चा उन बैठकों में बैठने वाले भाजपा नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं से की थी

और इन्हीं संभावनाओं के कारण राज्य भर के भाजपा कार्यकर्ता देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर उत्साहित थे। और अब उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर वह हतोत्साहित है।

भाजपा सूत्र के अनुसार शिंदे गुट अंतिम समय में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए अड़ गया और भाजपा की स्थिति उस समय उस सांप के जैसी हो गई जिसने गलती से ही सही, लेकिन केकड़ा तो निगल लिया, अब उसे न उगलते बन रहा था ना अंदर निगलते।

शर्मिंदगी न झेलनी पड़े इसीलिए भाजपा नेतृत्व ने एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री पद के लिए हामी भर दी। लेकिन इस झटके को देवेंद्र फडणवीस जैसे सरल चरित्र वाले राजनीतिज्ञ बर्दाश्त नहीं कर पाए।

और इसका उदाहरण एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन देने की घोषणा करने वाले पत्रकार परिषद में भी उनके चेहरे पर दिखा। और उप मुख्यमंत्री बनने के 12 दिन बाद भी उनके चेहरे और हाव-भाव में साफ दिखता है।

कुछ लोग यह भी अटकलें लगा रहे हैं की केंद्रीय नेतृत्व ने देवेंद्र फडणवीस के बढ़ते कद को सीमित करने के लिए जानबूझकर यह निर्णय लिया जबकि यह दलील बिल्कुल हास्यास्पद है।

पहले भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में ऐसे ही चर्चा होती रही है।

लेकिन इन दोनों राज्यों में भाजपा नेतृत्व ने कभी कोई बदलाव की बात नहीं की। उल्टे पार्टी नेतृत्व के आदेशों की अवहेलना कर गुटबाजी करने वाले भाजपाइयों को ठिकाने लगाते आई है।

महाराष्ट्र की राजनीति में देवेंद्र फडणवीस एक स्वच्छ छवि के नेता है और इनकी कर्मठता के कारण ही राज्य में अनेक वरिष्ठ भाजपा नेता होने के बावजूद भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने  देवेंद्र फडणवीस को प्राथमिकता दी। और पिछले सरकार में मुख्यमंत्री बनाया।

 

 

 

 

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