विगत पंद्रह सालों से डोम्बिवली के क्रीड़ा संकुल में आयोजित होने वाले आगरी महोत्सव के आयोजन को लेकर एक बार फिर कल्याण डोम्बिवली के आगरी समाज के नेताओं में जोरदार घमासान जारी है और इस घमासान में राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणविस पर इनके एक ग्रुप आगरी युथ फोरम को अपने एक तरफा सहयोग देकर आग में घी डालने का काम करने का आरोप लग रहा है. आगरी समाज का एक ग्रुप जहा मुख्यमंत्री के इस कथित पक्षपात से खुश है वहि विरोधी गुट की मुख्यमंत्री से नाराजगी साफ़ झलक रही है.
गौरतलब हो कि विगत पंद्रह वर्षों से डोम्बिवली पूर्व स्थित क्रीड़ा संकुल में आगरी युथ फोरम की तरफ से आगरी महोत्सव मनाया जाता रहा है। आगरी यूथ फोरम पिछले २० – २५ वर्षो से समाज के लिए कार्यरत है.इसमें शुरुवात में समाज के १०वी १२वी ग्रेजुएट,या उच्च शिक्षितों का सामूहिक सम्मान जैसे कार्यक्रम आयोजित किये जाते थे जो अज्ञात कारणों से अब बंद हो गया है.पिछले कुछ वर्षो से आगरी यूथ फोरम के अन्दर के कुछ सदस्य या फिर नए पीढ़ी के आगरी समाज के नेताओं को इन आयोजनों में खामिया दिखने पर अनेक लोग इसका विरोध भी करने लगे,
विरोधी गुट का आरोप है कि आगरी यूथ फोरम जिस लक्ष्य के साथ शुरू हुआ था.उससे वो पूरी तरह भटक गया है.अनेक लोग फोरम पर अब महज कुछ लोगो का कब्जा होने की बात कहते है यही लोग अपनी मनमानी चलाते है.अनेको के अनुसार आगरी समाज के उत्थान के लिए शुरू हुआ आगरी यूथ फोरम अब पूरी तरह व्यवसायिक हो गया है.
ऐसे ही अनेक मुद्दों पर विरोधी गुट एकजुट होकर गत वर्ष से इसी क्रीडा संकुल में आगरी – कोळी महोत्सव की शुरुवात की थी.और इस वर्ष उन्होंने आगरी महोत्सव की तारीख के दौरान ही आगरी – कोळी महोत्सव का आयोजन वो भी डोम्बिवली पूर्व के सावलाराम महाराज क्रीडा संकुल में करने का निर्णय लिया.और इसकी परमिशन के लिए इन आगरी – कोळी महोत्सव वालो ने पहले ही कल्याण डोम्बिवली मनपा में आवेदन दिया था.
उल्लेखनीय है की पिछले १५ वर्षो से आगरी यूथ फोरम आगरी महोत्सव का आयोजन इसी क्रीडा संकुल में करता रहा है.आगरी यूथ फोरम और आगरी – कोळी महोत्सव के आयोजको के इस विवाद में मुख्यमंत्री फडणविस ने हस्तक्षेप करते हुए सीधे कल्याण मनपा प्रशासन को आदेश दिया की क्रीडा संकुल आगरी यूथ फोरम को दिया जाए.
कल्याण डोम्बिवली के आगरी समाज के अनेक नेताओं ने मुख्यमंत्री का यह निर्णय पक्षपात पूर्ण करार दिया है उनके अनुसार समाज में कोई अगर दो पक्षों में विवाद है तो दोनों पक्षों के सदस्यों को बुलाकर समझोता की कोशिश मुख्यमंत्री को करनी चाहिए थी.कोई गलत है तो उसकी गलती बताकर मामला सुलझाना चाहिए.ऐसे पक्षपातपूर्ण निर्णय से दोनों गुटों में विवाद और बढेगा.और इसकी पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणविस की होगी.
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