डोंबिवली विधानसभा क्षेत्र भले ही जनसंघ के जमाने से भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रहा हो. आज राज्य स्तर पर भाजपा और शिवसेना में गठबंधन की घोषणा के साथ डोम्बिवली से भाजपा प्रत्याशी की हार निश्चित मानी जा सकती है क्योकि डोम्बिवली की वद से बदतर हालत से मतदाता चिढ़े हुए है. और इसके दुष्परिणाम आगामी चुनाव में देखने को मिल सकते है
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ज्ञात हो कि डोंबिवली विधानसभा क्षेत्र जनसंघ के जमाने से भाजपाइयों के कब्जे में रहा है जिसका मुख्य कारण यहां के सुशिक्षित और जागरूक मतदाता रहे है यहां के लोग अपने मताधिकार का उपयोग किसी व्यक्ति विशेष को नहीं देकर सिर्फ और सिर्फ कमल निशान देखकर करते रहे है हैं. एक समय था की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का काम दिल्ली के बाद सबसे अच्छी तरह डोंबिवली में माना जाता था
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लेकिन आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है डोंबिवली के मतदाता अब समझ चुके है कि उनकी इसी भेड़ चाल से डोंबिवली की हालत लगातार खराब हो गई है, ह्त्या बलात्कार, चोरी, राहजनी, जैसी घटना रोजमर्रा की चीज हो गई है वहि शैक्षणिक और सांस्कृतिक हलचल भी निचले स्तर पर चला गया है. इसका मुख्य कारण शहर के जनप्रतिनिधि है. जिन्हें शहर के विकास से कोई लेना देना नहीं है.
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डोम्बिवली की मुख्य समस्याओ में अनियोजित शहर, धडल्ले से हो रहे अवैध निर्माण, भ्रष्ट्राचार के कारण ही निम्न दर्जे की सड़के, स्वच्छता, पेयजल, जैसी सैकड़ो समस्या है. जिसका मुख्य कारण यहाँ के भ्रष्ट जन प्रतिनिधि है. जिन्हें हर जगह सिर्फ कमीशन चाहिए.उन्हें यहाँ की समस्या हल करने से कोई मतलब नही. और उन्हें पता है की चुनाव के बक्त लोग सब भूल कर उसे नही मोदी और कमल को वोट करेंगे.
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लेकिन इस चुनाव में डोम्बिवली के मतदाता भले ही शांत है लेकिन समय आने पर कैसे ऐसे भ्रष्ट नेताओं को सबक सिखाना है इसकी पूरी तैयारी कर रखी है. और आज राज्य में भाजपा शिवसेना में युति की घोषणा हुई है ऐसे में यहाँ से भाजपा प्रत्याशी की हार निश्चित मानी जा सकती है. क्योकि युति होने के बाद भाजपा प्रत्याशी के समक्ष सिर्फ एक ही विरोधी उम्मीदवार मनसे से रहेगा. और विरोधियो के मत विभाजन नही होने की स्थिति में यहाँ से भाजपा प्र्याशी की हार निश्चित है.
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उल्लेखनीय है की इसे सेटिंग कहे या सयोग, पिछले विधान सभा चुनाव में युति नही हुई थी और भाजपा प्रत्याशी चुनाव के पहले ही विजय माने जा चुके थे क्योकि उनके विरुद्ध शिवसेना और मनसे से आगरी समाज के उम्मीदवार खड़े हो गए थे. दोनों में मतविभाजन हुआ और मतदाताओं की नाराजगी के बावजूद जीत भाजपा प्रत्याशी की हुई.
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इसबार मनसे की तरफ से मंदार हलवे के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरो पर है. लेकिन उनके नामो की घोषणा अभी तक नही हुई है. आज युति की घोषणा हुई है इसके बाद अगर उनके नाम पर मुहर लग जाए. तो यह अनुमान लगाना गलत नही कि डोम्बिवली सीट का इतिहास बदल सकता है.
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