(मुंबई आसपास ब्यूरो )
उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र में फिर एक बार कालानी विरूद्ध आयलानी चुनावी जंग देखने को मिल रही है। जिससे उल्हासनगर की राजनीती में काफी उठापटक की स्थिति बन गई है। पूर्व विधायक सुरेश (पप्पू) कालानी इसी विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं जबकि उनकी पत्नी ज्योति कालानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से मौजूदा विधायक हैं।
सुरेश कालानी के बेटे ओमी कालानी ने टीम ओमी कालानी के नाम से शहर में अपना अलग राजनीतिक वजूद निर्माण किया हुआ है। इसी टीम ओमी कालानी के वर्चस्व को देखते हुए अपने तिकड़मी राजनीति के लिए मशहूर राज्य मंत्री रविंद्र चव्हाण ने टीम ओमी कालानी के कार्यकर्ताओं को बीजेपी में प्रवेश करवाने की रणनीति अपनाई थी। जो असफल साबित हुई थी। बाद में रविंद्र चव्हाण ने मुख्यमंत्री से विनंती कर टीम ओमी कालानी के कार्यकर्ताओं को बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर मनपा का चुनाव लड़वाया। इसके बाद टीम ओमी कालानी के २२ नगरसेवक मनपा में पहुंचे। और ओमी कालानी की पत्नी पंचम कालानी महापौर बनीं।
टीम ओमी कालानी ने शहर में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए बीजेपी से विधानसभा चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर की। इसके तहत ज्योति कालानी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा भी दिया। मगर बीजेपी के जिलाअध्यक्ष और पूर्व विधायक कुमार आयलानी ने इस सीट पर एक बार फिर अपनी दावेदारी पेश कर दी। बीजेपी ने भी कालानी परिवार को ख़ास तवज्जो नहीं दी और कुमार आयलानी फिर एक बार उल्हासनगर विधानसभा सीट से बीजेपी के प्रत्याशी बन गए।
इससे नाराज होकर कालानी परिवार ने फिर एक बार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने ज्योति कालानी को विधानसभा के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार दिया। अब टीम ओमी कालानी के सामने बड़ा प्रश्न यह खड़ा हो गया कि किसे समर्थन दिया जाए। आखिर कालानी परिवार का वर्चस्व कायम रखने के लिए टीम ओमी कालानी ने ज्योति कालानी को अपना समर्थन देना तय किया। इस बीच मुख्यमंत्री का उल्हासनगर में चुनावी दौरा हुआ और उनके मंच पर सिर्फ टीम ओमी कालानी में से नगरसेवक राजेश वधारिया ही उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने भी टीम ओमी कालानी के बारे में कुछ भी ना कहना ही बेहतर समझा।
बीजेपी से धोखा खाने के बाद अब कालानी परिवार पूरे तामझाम के साथ मैदान में है। उल्हासनगर में मौजूद उत्तर भारतीय मतदाताओं की संख्या सत्तर हजार के करीब है। इन मतदाताओं का समर्थन जुटाने के लिए कुमार आयलानी ने मनोज तिवारी और अन्य उत्तर भारतीय चेहरे चुनाव प्रचार में उतारे लेकिन बात बन नहीं पा रही है। उत्तर भारतीयों का एक बड़ा वर्ग आज भी कालानी परिवार के प्रति निष्ठा बनाकर खड़ा है। यही वजह है कि कुमार आयलानी को अपनी जीत हार में बदलती नजर आने लगी है। उल्हासनगर में शिवसेना की बात करें तो शिवसेना शहर अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी यह सीट बीजेपी से छीनकर अपने पाले में डालना चाहते हैं और यही वजह है कि शिवसेना कालानी विरूद्ध आयलानी की यह जंग चुपचाप देख रही है। कुल मिलाकर कुमार आयलानी इन चिनावों में फिर एक बार कालानी से कम पड़ते दिख रहे हैं।
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