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नामांकन के बाद अंधेरी की राजनीति गरमाई । उत्तर भारतीय और गुजराती मत होंगे निर्णायक

शीतला प्रसाद सरोज
मुंबई। नामांकन के आखरी दिन राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों की ओर से नामांकन करने के बाद अंधेरी की राजनीत अचानक गरमा गई।

शुक्रवार को अंधेरी ( पू. ) स्थित गुंदवली में बने निर्वाचन कार्यालय में भाजपा-शिंदे गुट के प्रत्याशी मुरजी ‘काका’ पटेल, महाविकास आघाड़ी प्रत्याशी ऋतुजा रमेश लटके सहित कई क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशियों ने नामांकन किया।

इससे पहले 13 अक्टूबर को लोगों का ध्यान बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर लगा हुआ था,जहां महाविकास आघाड़ी प्रत्याशी ऋतुजा रमेश लटके की ओर से महानगरपालिका ( बीएमसी ) के खिलाफ याचिका दाखिल की गई। कोर्ट में याची की ओर से कहा गया था कि वह उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट से अंधेरी पूर्व विधानसभा का उपचुनाव लड़ना चाहती है।

लेकिन उसका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जा रहा है। 14 अक्टूबर को नामांकन की आखरी दिन है। ऐसी दशा में उसके साथ न्याय किया जाए।
दोनों ओर से जिरह/ बहस सुनने के बाद कोर्ट ने ऋतुजा लटके को बड़ी राहत दी।

मुंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई महानगरपालिका ( बीएमसी ) को आदेश दिया है कि वह 14 को दिन में 11 बजे तक ऋतुजा लटके का इस्तीफा मंजूर करे और इस बारे में याचिकाकर्ता को सूचित भी करे।

बता दें कि आज यानि कि शुक्रवार को मुंबई के अंधेरी ईस्ट विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन की अर्जी भरने का आखिरी दिन था।ऋतुजा लटके को उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने उम्मीदवार बनाया है। वह दिवंगत शिवसेना विधायक रमेश लटके की पत्नी हैं।

इस्तीफे के नियमों के मुताबिक उन्हें एक महीने पहले नोटिस देना था। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे की ओर से उम्मीदवारी की अर्जी भरने के लिए ऋतुजा लटके ने बीएमसी की नौकरी से इस्तीफा दिया था। लेकिन लटके का इस्तीफा कई वजहों से लटक रहा था।

इस्तीफे के नियमों के मुताबिक उन्हें एक महीने पहले नोटिस देना था। उन्होंने 2 सितंबर को इस्तीफा दे भी दिया था। लेकिन इस्तीफे के पत्र में यह लिखा कि अगर वे ठाकरे गुट की तरफ से अंधेरी ईस्ट विधानसभा का उपचुनाव जीत जाती हैं तो इस्तीफा स्वीकार किया जाए, वरना स्वीकार नहीं किया जाए।

बीएमसी ने इस्तीफे का कोई जवाब नहीं दिया। जब महीने पूरे होने को आए और ऋतुजा लटके ने सवाल किया तो बीएमसी ने तकनीकी कारण बताया और फिर से इस्तीफा देने को कहा। इसके बाद ऋतुजा लटके ने 3 अक्टूबर को फिर इस्तीफा दिया। अब बीएमसी ने कहा कि नियम के लिहाज से इस्तीफा एक महीने बाद ही मंजूर होगा

शिंदे और ठाकरे गुट में टशन चलता रहा, लटके का इस्तीफा लटकता रहा,

इस बीच ठाकरे गुट ने एकनाथ शिंदे गुट पर आरोप लगाया कि वह बीएमसी पर इस्तीफा स्वीकार नहीं करने का दबाव बनाया था। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि ऋतुजा लटके को शिंदे गुट में शामिल होने को कहा गया था और उन्हें चुनाव लड़ने के साथ ही मंत्रिपद का भी लालच दिया गया।

लेकिन ऋतुजा लटके ने यह साफ कर दिया कि उनके पति की निष्ठा बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे के प्रति थी, इसलिए वे भी निष्ठा नहीं बदलेंगी और वे ठाकरे गुट से ही चुनाव लड़ेगी, वरना नहीं लड़ेंगी। ठाकरे गुट की ओर से पूर्व मंत्री अनिल परब ने यह भी दावा किया था कि ऋतुजा लटके का इस्तीफा तुरंत मंजूर हो जाता अगर वह शिंदे गुट में शामिल हो जाती। ठाकरे गुट में रहने की उन्हें सजा दी जा रही थी।
हाई कोर्ट ने पूछा- लटके का इस्तीफा क्यों लटकाया ?
इसके बाद ठाकरे गुट की सलाह पर ऋतुजा लटके बॉम्बे हाईकोर्ट चली गईं। हाईकोर्ट ने बीएमसी से सवाल उठाया कि लटके का इस्तीफा क्यों लटकाया ?

बीएमसी ने भ्रष्टाचार का सवाल उठाया। कहा ऋतुजा के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत है। कोर्ट ने पूछा अब पता चल रहा है कि भ्रष्टाचार की शिकायत है ? कोर्ट ने बीएमसी को आदेश दिया कि 14 अक्टूबर को दिन में 11 बजे तक इस्तीफा मंजूर हो जाना चाहिए।

गौरतलब है कि कल यानि कि गुरुवार का दिन भाजपा-शिंदे गुट के प्रत्याशी मुरजी पटेल ‘काका’ के लिए भी काफी मशक्कत का रहा। कोर्ट में जहां ऋतुजा रमेश लटके बीएमसी के खिलाफ दाखिल की गई अपनी याचिका के निर्णय की ओर टकटकी लगाए थीं,वही मुरजी ‘काका’ पटेल एबी फार्म के लिए दिन भर संघर्ष करते रहे।

प्रत्याशी के रूप में भाजपा मुरजी का दूसरा पर्याय ढूढ़ रही थी। लेकिन मुरजी का कोई दूसरा विकल्प नहीं मिला। अंत में देर रात मुरजी ‘काका’ पटेल को एबी फार्म दिया गया। अगर एबी फार्म ‘काका’ को पहले ही दिया गया होता तो वह 13 अक्टूबर को ही नामांकन कर देते।

इस उपचुनाव में मुरजी ‘काका’ पटेल और दिवंगत विधायक रमेश लटके की पत्नी ऋतुजा लटके के बीच सीधी टक्कर है।ऋतुजा लटके मुरजी ‘काका’ पटेल कड़ी टक्कर दे रहीं हैं। ‘काका’ के पसीने छूट रहे हैं।

महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस, एनसीपी के होने से से ऋतुजा का पलड़ा बीस लग रहा है। उत्तर भारतीय और गुजराती मत भी काफी निर्णायक होंगे,जो ज्यादातर इस समय भाजपा के साथ हैं। उत्तर भारतीय और गुजराती मतों पर ‘काका’ की पकड़ ढीली पड़ी तो वह लड़ाई से बाहर हो जाएंगे।

अंधेरी के टोटल मतदाता- 319836.
मराठी-105511.
उत्तर भारतीय- 58663. मुश्लिम-37931.
दक्षिण भारतीय- 19547. क्रिश्चन-14961.

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