Crime

अमित शाह का फर्जी लेटर लेकर मुंबई से सूरत लौट रहा था, पुलिस ने पकड़ा

 

सूरत निवासी 33 साल के रियल एस्टेट ब्रोकर को लॉकडाउन के दौरान घूमने की ऐसी सनक चढ़ी कि उसने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का नकली हस्ताक्षर ही बनवा लिया। गृहमंत्री के जाली साइन वाला लेटर लेकर वह मुंबई घूमता रहा फिर सूरत वापस जाते वक्त पकड़ा गया। यह खुराफाती आइडिया रियल एस्टेट के दोस्तों का था जिन्होंने फोन के जरिए उसे यह तरकीब सुझाई थी।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है जबकि उसके दोनों दोस्त फरार हैं।

आरोपी राजेश पटेल ने सोचा कि वह बड़े आराम से दो लोगों के साथ कारपूल करते हुए मुंबई से सूरत वापस आ जाएगा और कोई उसे ढूंढ नहीं पाएगा। जब महाराष्ट्र पुलिस को उस पर कोई शक नहीं हुआ तो वह और भी ज्यादा टेंशन फ्री हो गया। उसे लगा कि गुजरात अमित शाह का गृह राज्य है इसलिए वहां तो कोई इस पर जांच नहीं करेगा। पटेल ने मुंबई सूरत हाइवे पर पड़ने वाले भिलाड, दमनगंगा और भगवाडा जैसे बड़े चेकपोस्ट पार कर लिए लेकिन वलसाड में वाघलधारा में तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया।

मनीष ने कथित रूप से स्पेशल परमिशन वाला लेटर तैयार किया और उसमें गृहमंत्री के जाली हस्ताक्षर कर डाले। उसने इसे राजपुरोहित को वॉट्सऐप कर दिया। फिर राजपुरोहित ने उसे राजेश पटेल को फॉरवर्ड कर दिया। लेटर में 27 मार्च की डेट पड़ी थी।

लेटर में राजेश पटेल को फार्मास्युटिकल बिजनसमैन बताया गया था जिसमें सभी राज्यों के डीजीपी को एड्रेस करते हुए लिखा गया, ‘यह सूचित करने के लिए पत्र लिखा गया है कि राजेशकुमार गोविंदभाई पटेल को दवाइयों और फार्मास्युटिकल काम के लिए पूरे देश में यात्रा करनी होगी और वे कोविड-19 को लेकर एहतियात बरतते हुए अपना काम कर सकते हैं।’

लेटर में नीचे गृहमंत्री के नकली हस्ताक्षर भी थे। 12 अप्रैल को राजेश बांद्रा से सूरत के लिए निकला। उसके साथ महिला समेत दो और लोग थे। उन्होंने तीन चेकपोस्ट पास कर लिए लेकिन वाघलधारा चेकपोस्ट पहुंचते ही उसे रोक दिया गया। जब हेड कॉन्स्टेबल हितेशकुमार दर्जी ने लेटर की असली कॉपी मांगी तो वह घबरा गया।

इसके बाद तीनों को पकड़कर डुंगरी पुलिस थाने लाया गया जहां पूछताछ के दौरान उसने सच बताया। राजेश पटेल के खिलाफ जालसाजी, आपराधिक साजिश और सरकारी नियम का उल्लंघन करने के तहत मामला दर्ज हुआ। उसके दोनों दोस्त मनीष और राजपुरोहित फरार हैं ।

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